: आरंग का भांड देवल जैन मंदिर अति प्राचीन...
Sun, Oct 27, 2024
भांड देवल मंदिर, ग्यारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध का एक जैन मंदिर है,आरंग (राय पुर)के महाकोशल क्षेत्र में है। इसे वास्तुकला भूमिजा शैली में बनाया गया है। इस मंदिर के चबूतरे पर विस्तृत अलंकरण है। एक चबूतरा है जो एक कुर्सी को सहारा देता है, दीवार पर मूर्तियों की दो पंक्तियाँ हैं। मंदिर का 'ले आउट प्लान' एक स्टार आकार में है जिसे स्टेलेट (जिसका अर्थ -एक तारे के आकार का, जिसमें बिंदु या केंद्र से निकलने वाली किरणें हैं)के रूप में जाना जाता है, जिसमें छह "ऑफसेट" हैं।मंदिर पाँच मंजिलाँ ऊँचा हैअसामान्य विशेषता माना जाता है। मंदिर पश्चिम की ओर है और जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है। अतीत में, मंडप (एक बाहरी मंडप),एक बरामदा संभवतः मंदिर के हिस्से के रूप में मौजूद था। मंदिर में गर्भगृह या गर्भगृह में जैन तीर्थंकरों की 3 स्वतंत्र रूप से खड़ी बड़ी छवियाँ हैं। इन्हें काले पत्थर में अलंकृत रूप से उकेरा गया है,अत्यधिक पॉलिश किया गया है।तीर्थंकरों में अजित नाथ , नेमिनाथ,श्रेयासन नाथ हैं। केंद्रीय आकृति को बाएं हाथ में दो हिरणों को पकड़े एक चक्र के प्रतीक से सजाया गया है, दाहिने हाथ पर एक ग्लोब है। इस छवि के आधार पर "पंख वाली आकृति" नक्काशी है। नक्काशीदार छवियां मंदिर के बाहरी चेहरों को भी सुशोभित करती हैं।रायपुर-महासमुंद की सीमा में स्थित आरंग जैन धर्म के अनुयायियों का प्रमुख स्थल है।जैन प्रतिमाओं के अलावा गुप्तकालीन मुद्राएं,राजर्षि तुल्य कुलवंश, शरभपुरीय, कलचुरी शासकों केअनेक अभिलेख मिले हैं।आरंग का भांड देवल मंदिर छत्तीसगढ़ में जैन धर्म का सबसे प्रमुख मंदिर माना जाता है।रायपुर महासमुंद रोड पर 36किमी दूरी पर स्थित आरंग महत्व पूर्ण ऐतिहासिक स्थल है।आरंग महाभारत काल के राजा मोरध्वज की नगरी मानी गई है।आरंग में एक समय जैनधर्म का महत्वपूर्ण केंद्र भी था।यहां11वीं सदी का प्राचीन मंदिर स्थित है,जैन धर्म को समर्पित है। यह मंदिर भांड देवल के नाम से लोकप्रिय है। भांड देवल मंदिर एक ऊंची जगती पर बना है, पश्चिमाभि मुखी है, मंदिर ताराकृती में पंचरथ और भूमिज शैली में बना हुआ है।गर्भगृह में तीन तीर्थंकर की सुन्दर, चमकदार कायोत्सर्ग मुद्रा वाली प्रतिमाएँ अधिष्ठित हैं। पश्चि ममुखी मंदिर ऊँची जगती पर निर्मित है,आधार विन्यास में पंच रथाकार है। नागर शैली में निर्मित इस मंदिर के मंडप और मुख मंडल का आधार से ऊपर का भाग विनिष्ट हो चुका है। मंदिर की बाह्य भित्ति अधिष्ठित से लेकर अमालक तक उरु श्रँगों और कुलिकाओं से अलंकृत हैं। जैन तीर्थंकार यक्ष- यक्षिणी और देव प्रतिमाओं तो हैं, इसके अतिरिक्त भी आलिंगनरत मिथुन मूर्तियाँ का भी उत्कीर्णन किया गया है। अधिष्ठा नभाग की सज्जा 5 पट्टीका ओं,हँसवाली नृत्य-संगीत के दृश्य,कीर्तिमुख,ज्यामिति अभिप्राय के अँकनों से युक्त है। कला की दृष्टि से हैहयवंशीय शासकों द्वारा निर्मित माना जाता है।
: चांग भखार परिक्षेत्र वीर योद्धाओं की भूमि है- मानसिंह
Sat, Oct 26, 2024
जनकपुर। एमसीबी। छत्तीसगढ़ शासन उच्च शिक्षा विभाग तथा संत गहिरागुरु विश्वविद्यालय सरगुजा अम्बिकापुर के द्वारा जारी दिशा निर्देश के अनुरूप शासकीय नवीन महाविद्यालय जनकपुर में जनजातीय समाज का गौरवशाली अतीत, ऐतिहासिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक योगदान विषय पर एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्य वक्ता के रुप में जनजातीय जागरण मंच के सरगुजा संभागाध्यक्ष परमेश्वर सिंह तथा विशिष्ट वक्ता के रुप में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बहरासी के प्राचार्य सच्चिदानंद साहू उपस्थित रहें। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य वक्ता परमेश्वर सिंह के साथ महाविद्यालय के प्राचार्य अतुल कुमार वर्मा के द्वारा वीरांगना रानी दुर्गावती और भगवान बिरसा मुंडा के चित्र पर माल्यार्पण तथा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया तत्पश्चात छत्तीसगढ़ के राज्य गीत का गायन हुआ
अतिथियों का स्वागत एवं उनका परिचय राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी परमानंद द्वारा किया गया, कार्यक्रम की रुपरेखा एवं कार्यक्रम की उपादेयता के बारे में इस कार्यक्रम के संयोजक हिन्दी के सहायक प्राध्यापक महावीर पैकरा के द्वारा प्रकाश डाला।
विशिष्ट वक्ता सच्चिदानंद साहू के द्वारा जनजातीय समाज के रहन -सहन एवं गौरवशाली इतिहास के बारे में तथा उनके समक्ष वर्तमान की चुनौती के बारे में विस्तार से प्रकाश डाला, ज़िला पंचायत सदस्य रविशंकर सिंह के द्वारा जल ,जंगल,जमीन तथा प्राकृतिक प्रेम एवं गौरवशाली रीति रिवाज के बारे में बताया।
मुख्य वक्ता परमेश्वर सिंह ने रानी दुर्गावती के 500 वीं जयंती वर्ष तथा भगवान बिरसा मुंडा के परिचय से प्रारंभ करते हुए गुमनाम जनजातीय नायकों के बारे में व्याख्यान दिया, तथा इतिहास से प्रेरणा लेकर अपने भविष्य के उत्थान के बारे में विस्तार से बताया, महाविद्यालय के युवा छात्र एवं छात्राओं के मन मस्तिष्क में ऊर्जा एवं ज्ञान का संचार करतें हुए सेवानिवृत्त प्रधानपाठक मानसिंह के द्वारा चांग भखार परिक्षेत्र के स्थानीय वीर योद्धाओं के बारे में दृष्टांत बताया कि ग्राम उचेहरा के वीर बरखडी तथा ग्राम खांडा के जांबाज भीमसेन की रस्सी खेल प्रतियोगिता के बारे में बताया।
सेवानिवृत्त प्राचार्य नन्दीलाल साकेश के द्वारा छात्र एवं छात्राओं के द्वारा अपने कर्तव्य के पालन तथा अपने सांस्कृतिक,जीवन मूल्यों के बारे में विचार व्यक्त किया गया।
कार्यक्रम के अन्त में आभार प्रदर्शन करते हुए महाविद्यालय सह संयोजक आशुतोष वर्मा के द्वारा कहा गया आज की इस कार्यशाला में वक्ताओं के द्वारा बताए गये विचारों को अपने जीवन में आत्मसात कर के आगे बढ़ना है,इस अवसर पर IQAC प्रभारी डॉ अवनीश कुमार पटेल, हेमंत बंजारे,ऋषभ बोरकर, डॉ विनीत कुमार पाण्डेय, अतिथि व्याख्याता गीतिका वर्मा, डॉ दीपशिखा पटेल,मोनिका मिश्रा,नुकेशवर निषाद, शकील खान ,महरोज बेगम, युवराज सिंह जगत, शमीम खान, कमलेश कुमार बैगा, रमेश कुमार यादव,रघुवीर सिंह बंसल, विद्या सागर, टाकेशवर रजवाड़े, चन्द्र प्रताप सिंह, उजाला सोनी, नीतीश साहू, सारिका सिंह, सहित बड़ी संख्या में छात्र एवं छात्राएं उपस्थित रहें।
: वृद्ध आश्रम मे दिवाली मनाने पहुंचे डॉ.आर एन एस शिक्षा महाविद्यालय के छात्र
Sat, Oct 26, 2024
मनेन्द्रगढ़।एमसीबी। डॉ.आर.एन. एस. शिक्षा महाविद्यालय मनेंद्रगढ़ के छात्र एवम् छात्राओ द्वारा दीपावली पर्व के अवसर पर वृद्धा आश्रम मे वृद्धजनो के साथ दीवाली मनाई गई, जिसमे छात्राओ द्वारा नगर भ्रमण कर रैली निकाली गई तत्पश्चात भगत सिह तिराहा के पास नुक्कड नाटक किया गया जिसमे लोगो को जागरूक किया गया कि आज के समय मे हमे अपने माता पिता एवं बुजुर्गो को सम्मान करते हुए वृद्धा आश्रम मे ताला लगा कर अपनों को घर पर परिवार के साथ सम्मान एव प्रेम के साथ रखा जाय। दीवाली पर्व के अवसर पर छात्र एवं छात्राओ द्वारा वृद्धा आश्रम मे नए कपड़े, गर्म हीटर , फल एवं मिठाई उपहार भेट किया गया। वृद्धजन अपने बीच छात्र एवं छात्राओ को पाकर बहुत हर्ष एवं सम्मान की भावना से अभिभूत हो गये, इस अवसर पर महाविद्यालय प्रभारी प्राचार्य नीतू सिंह, सहायक प्रध्यापक नरेंद्र कुमार श्रीवास्तव, अन्कित श्रीवास्तव,संकेत शर्मा, शिवकुमार,अंकिता कश्यप,अनुपमा बनर्जी,खुशी शर्मा,पिंकी राव, सहित समस्त छात्राध्यापक एवं छात्राध्यापिकाये उपस्थित रहे।