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25th June 2026

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तेलनदी से ढोर्रा बांध जोड़ो अभियान चलाने की जरूरत है, हो सके तो क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को सत्याग्रह आंदोलन करना चाहिए

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रोशन लाल अवस्थी की कलम से : तेलनदी से ढोर्रा बांध जोड़ो अभियान चलाने की जरूरत है, हो सके तो क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को सत्याग्रह आंदोलन करना चाहिए

Praveen Nishee Thu, Jun 25, 2026

देवभोग। गरियाबंद । छत्तीसगढ़ राज्य एवं गरियाबंद जिले के अन्तिम छोर अति पिछड़ा क्षेत्र देवभोग अंचल आज भी आजादी के 79 साल बाद भी अपने बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है । सिंचाई, पेयजल, चिकित्सा, स्वास्थ्य, सड़क, आवागमन जैसे अनेक बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्षरत है ? अनेकों योजनाएँ बनी कहीं अधूरे रह गए या बनी भी तो भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई ? मूलभूत सुविधाओं में एक सिंचाई सुविधा है, प्राकृतिक संसाधनों का कोई कमी नहीं है, किन्तु दोहन नहीं किया जा सका । देवभोग अंचल में सुविधाओं के नाम पर सिंचाई सुविधा 5 प्रतिशत से भी कम है, इस क्षेत्र में जीवन दायिनी के नाम पर तेलनदी है लेकिन दूरदर्शी योजना नहीं बन पाया है, जिससे देवभोग की धरती बूंद बूंद पानी के तरस रहा है । देवभोग अंचल के लिए एक लघु सिंचाई योजना एक ढोर्रा बांध है जो रख- रखाव के अभाव में और सिंचाई अधिकारियों की निष्क्रियता से जीर्ण- शीर्ण हालात में है । एक बार मैने कुछ लिखा- पढ़ी किया था तो मुख्य नहरों का कुछ निर्माण किया गया था किन्तु भ्रष्ट अधिकारियों ने लीपापोती कर धनराशि को डकार गए हालांकि उच्च स्तर पर कार्यवाही करने पत्र मेरे द्वारा किया था किन्तु भ्रष्टाचार की जड़ इतनी मजबूत है कि कभी जांच नहीं हुआ । वर्ष 1991 में जब मैं बिन्द्रानवागढ़ विधानसभा क्षेत्र के तीन बार अविजित विधायक स्व. श्री बलराम पुजारी के निजी सचिव था तब विधायक के लेटरपैड में सिंचाई मंत्री मध्यप्रदेश शासन को पत्र लिखा था कि देवभोग अंचल में जीवनदायिनी तेलनदी है जिसका पानी बेकार बह जाता है जिसे उरमाल जल प्लावन योजना से बने मुख्य नहर के माध्यम से ढोर्रा बाँध को जोड़ने से हजारों हेक्टेयर भूमि का सिंचाई रकबा बढ़ जायेंगे जिससे हर साल अकाल की विभीषिका झेलने वालों किसानों को कुछ राहत मिलेगी किन्तु उक्त प्रस्ताव को अधिकारियों ने एक सिरे से खारिज कर दिया कि उक्त बाँध की हालत जर्जर एवं क्षमता नहीं है । आज एक बार तेलनदी से ढोर्रा बाँध जोड़ो अभियान चलाने की जरूरत है, क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों एवं किसानों को मिलकर एक सत्याग्रह आंदोलन करने की जरूरत है ऐसा मेरा अनुरोध है ।

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