छग की विष्णु देव सरकार ने मिलने वाली 200 यूनिट मुफ्त बिजली योजना में बड़ा बदलाव करते हुए 50 यूनिट तक सीमित कर आम उपभोक्ताओं को झटका तो दिया है पर साथ ही पीएम सूर्य घर योजना विकल्प के तहत घर-घर बिजली उत्पादन, करीब 75% सब्सिडी के साथ करने का विकल्प भी दिया है, छ्ग सरकार का स्लोगन है 'अब बिजली में छूट नहीं मुफ्त बिजली'।भूपेश बघेल सरकार ने 2019 में घरेलू उपभोक्ताओं को400 यूनिट बिजली की खपत पर 200 यूनिट बिल माफ कर दिए थे, दो तिहाई से अधिक आबादी को लाभ हुआ था। हाफ बिजली बिल योजना से 200 यूनिट बिज ली की खपत करनेवाले उपभोक्ताओं को बिजली मुफ्त में ही मिल रही थी। निस्संदेह यह लोकप्रिय राजनीतिक फैसला था। अकेले छग की बात नहीं है, देश में बिजली बोर्डों, उससे जुड़ी संस्थाओं का बुरा हाल है, जिससे बिजली क्षेत्र में भारी विसंगतियां हैं, जिसे दूर करने की जरूरत है। छग की सरकार ने 400 यूनिट बिजली बिल हाफ योजना को सीमित कर 10 0 यूनिट तक करने के अपने फैसले पर प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का जिक्र किया है, संदेश देने की कोशिश की है, उप भोक्ता इसकी ओर प्रेरित हों। दरअसल जिस तरह यह कदम उठाया गया है, उससे यही लगता है हाफ बिजली बिल योजना में बद लाव की बड़ी वजह भी यही है।जब इलेक्ट्रिक वाहनों पर जोर दिया जा रहा है, अब यह समझना ही पड़ेगा कि आम उपभोक्ताओं के लिए बिजली की जरूरतें किस तरह बढ़ी हैं? हाफ बिजली बिल योजना को 100 यूनिट तक सीमित करने से उपभोक्ताओं का बड़ा वर्ग इससे वंचित हो जाएगा। जहां सौर ऊर्जा की बात है, इससे बहुत से ऐसे लोग वंचित हो सकते हैं, जिनके पास सोलर पैनल लगाने के लिए पक्के, छत वाले मकान नहीं हैं, बहु मंजिला इमारतों के फ्लैट में रहते हैं। निस्संदेह,मोदी सर कार का अक्षय उर्जा पर जोर है,सौर ऊर्जा, विकल्प के तौर पर देखा ही जाना चाहिए लेकिन साथ यह भी देखने की जरूरत है बिजली सामाजिक क्षेत्र असमानता का कारण न बन जाए!छग सरकार प्रदेश की बिजली विपणन कंपनी सीएसपी डीसीएल की करीब 10 हजार करोड़ रुपए की कर्जदार है। यह उस कंपनी के 10 हजार करोड़ ₹ हैं,जिस कंपनी का सालाना राजस्व 21 हजार करोड़ ₹ है। यही सबसे हैरान करने वाली बात है। सरकार के अलग- अलग विभागों के बिजली बिल, सरकार की तरफ से देने वाली सब्सिडी के तौर पर कर्जे की रकम बिजली कंपनी को लेना है। बिजली कम्पनियों का घाटा कम करने का एक विकल्प यह भी है कि सरकारी विभागों, आवासों से बिजली बिल की बकाया राशि की कड़ाई से वसूली की जाये।
डॉ रवि मित्तल के नाम
बनता रिकार्ड......
डॉ रवि मित्तल का रिकार्ड बनता जा रहा है। 22 साल की उम्र में एमबीबीएस कर, 2016 में आईएएस,9 साल की ही वरिष्ठता में आयुक्त जनसम्पर्क से सीएम सचिवालय में संयुक्त सचिव का सफऱ के पीछे उनकी अच्छी कार्य प्रणाली,सभी की मदद अच्छा व्यवहार ही है। जश पुर कलेक्टर की लंबी पारी खेलने वाले डॉ रवि मित्तल, का चिकित्सक परिवार से वास्ता हैं।उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई की है। यूपी के रहने वाले रवि मित्तल ने एमबीबीएस की पढ़ाई के दौरान यूपीएससी की भी परीक्षा दी,कामयाबी का झंडा गाड़ा,आईएएस होने के बाद रायगढ़, रायपुर के जिला पंचायत सीईओ रह चुके हैं।पहले जशपुर के ही एसडीएम भी रहे हैं।डॉ रवि मित्तल ने 29 अगस्त2016 को छग कैडर के आईएएस के तौर पर ज्वाइनिंग दी। एमबीबीएस के अंतिम वर्ष में ही यूपीएससी में रवि मित्तल शामिल हुए। बिना किसी कोचिंग के ही सेल्फ स्टडी कर पहले प्रयास में यूपीएससी में 61 वीं रैंक हासिल की। उन्हें छग कैडर मिला। रवि मित्तल महज 22 साल की उम्र में पहले ही प्रयास में आईएएस बने।मूलरूप से यूपी के बिजनौर जिले के चांदपुर इलाके के कटारमल के वो रहने वाले हैं।पिता केसी मित्तल प्रसिद्ध डाक्टर हैं।रवि ने मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज दिल्ली से एमबीबीएस की पढ़ाई की।इन्हें अभी करीब दो दशक तक सरकार की सेवा करना है।
उर्दू-फ़ारसी के शब्द
पुलिस हटाएगी....
अंग्रेजों के जमाने से ही पुलिस की कार्यप्रणाली खास तौर से एफआईआर, डेली डायरी आरोप पत्र का हिस्सा उर्दू/ फारसी के शब्द हिंदी- अंग्रेजी के शब्दों से तब्दील होने जा रहे हैं।छग सरकार ने पुलिस की कार्य प्रणाली में प्रयुक्त होने वाले कठिन,पारंपरिक आम नागरिकों की समझ से बाहर उर्दू - फारसी शब्दों को हटाने का फैसला किया गया है, उनकी जगह सहज और प्रचलित हिंदी शब्दों का उप योग किया जाएगा।छ्ग में देर से सही गृहमंत्री विजय शर्मा ने पुलिस अधीक्षकों को भी इसके लिए आदेश जारी कर दिया गया है उदा हरण के लिए हलफनामा की जगह शपथपत्र, दफा की जगह धारा, फरियादी की जगह शिकायतकर्ता और चश्मदीद की जगह प्रत्यक्षदर्शी शब्द का इस्तेमाल किया जाना तय किया गया है।पुलिस अब अपनी कार्यवाही में अदम तामील, इन्द्राज, खयानत, गोश्वारा जैसे आम लोगों को समझ न आने वाले उर्दू -फारसी के कठिन शब्दों के स्थान पर क्रमशः सूचित न होना, टंकन, हड़पना, नक्शा जैसे आसान शब्दों का उपयोग करने का फैसला किया है।पुलिस ने 109 शब्दों की सूची जारी की है जिसके स्थान पर सरल शब्दों को शामिल किया जाएगा।इस सूची में दीगर के स्थान पर दूसरा, नकबजनी के स्थान पर सेंध,माल मशरूका लूट की जगह चोरी गई संपत्ति, मुचलका की जगह व्यक्ति गत बंध पत्र,रोजनामचा के स्थान पर सामान्य दैनिकी, शिनाख्त की जगह पहचान जरायम के स्थान,अपराध जैसे शब्दों को शामिल किया गया है। पुलिस की व्यवस्था को और अधिक जनसुलभ,पारदर्शी,संवेदात्मक बनाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है।
गौरलाटा नहीं, बैलाडीला
की नंदीराज है सबसे
ऊंची चोटी
भूगोलविद ने दावा किया है छग की सबसे ऊंची पर्वत चोटी बलरामपुर का गौर लाटा नहीं,बल्कि बैलाडीला का नंदीराज है। इस दावे को सरकार के स्वीकारने के बाद सही मानना पड़ेगा अब तक गौरलाटा ही छ्ग की सबसे ऊंची चोटी मानी जाती रही है। भूगोलविद प्रो. पीएल चंद्राकर ने गौर लाटा की जगह बस्तर के बैलाडीला स्थित नंदीराज शिखर को सबसे ऊंचीचोटी बताया है।सीएमडी कॉलेज भूगोल के प्रो. चंद्राकर ने 'सर्वे ऑफ इंडिया' देहरादून द्वारा ही प्रकाशित धरातल पत्रक और सेटेलाइट इमेज का हवाला देकर दावा किया कि है-बलरामपुर-रामानुज गंज के लहसुनपाट स्थित गौरलाटा पर्वत की ऊंचाई 1244 मीटर ही है, जबकि बस्तर के बैलाडीला स्थित नंदीराज शिखर की ऊंचाई 23 मीटर अधिक 1267 मीटर है। प्रो. चंद्राकर ने बताया सर्वे ऑफ इंडिया के दस्तावेज, सेटेलाइट इमेज से राजमेढ़गढ़ मैकल पर्वत की सबसे ऊंची चोटी है, इसकी ऊंचाई 1131 मीटर है।
और अब बस........
0मनी लांड्रिंग मामले में भूपेश बघेल और उनके बेटे चैतन्य काे सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, सलाह पर अब हाईकोर्ट गये।
0सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने बताया कि जून 2026 से कुम्हारी टोल प्लाजा वसूली को पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा।
0मिड-डे मील में बच्चों को कुत्ते का जूठा खाना परो सने के मामले में हाईकोर्ट सख्त,शिक्षा सचिव से मांगा व्यक्तिगत हलफनामा...
0छग में वन विभाग ने सरगुजा जिले के हसदेव अरंड वन में केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक परियोजना के लिए 1742.60 हेक्टेयर वन भूमि के इस्तेमाल कीमंजूरी देने की अनुशंसा की है।