: एमसीबी जिले में संचालित समस्त स्कूल बसों की चेकिंग 17 मई को
Thu, May 16, 2024
मनेन्द्रगढ़/एमसीबी/16 मई 2024/ उच्च न्यायालय बिलासपुर द्वारा याचिका क्रमांक डब्ल्यूपीसी (पीआईएल) को पारित आदेश के तारतम्य में छ.ग. शासन परिवहन विभाग की अधिसूचना नवम्बर 2015 जारी की जाकर स्कूल बस अनुज्ञा पत्र के लिए शर्तें जारी की गई है एवं सर्वोच्च न्यायालय नई दिल्ली द्वारा संदर्भित पत्र में दर्शित 16 बिन्दु वाले मापदंड पर वाहन की चेकिंग हेतु पत्र प्राप्त हुआ है। जिला परिवहन अधिकारी द्वारा बताये गये जानकारी अनुसार संदर्भित पत्र के परिपालन में कोरिया एवं जिला मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में संचालित समस्त स्कूल बसों की चेकिंग 17 मई 2024 को प्रातः 10ः00 बजे जिला परिवहन कार्यालय बैकुण्ठपुर जिला कोरिया में किया जाना है। जिला परिवहन अधिकारी ने जिले समस्त स्कूल बस संचालकों को उक्त स्थान एवं समय पर उपस्थित होने का आग्रह किया है। प्रत्येक स्कूल बस को छत्तीसगढ़ मोटरयान नियम 1994 के नियम 114 के उप नियम(5) के अनुसार पीला रंग में रंगा जायेगा तथा वाहन के सामने एवं पीछे स्कूल बस अंकित किया जायेगा। स्कूल बस के बाह्य भाग में दोनों ओर 09 इंच की एक पट्टी होगी, जिस पर स्कूल का नाम, पता व टेलीफोन, मोबाईल नंबर अंकित किया जायेगा। बसों के खिड़कियों में क्षैतिज के समांतर जाली की व्यवस्था की जायेगी। प्रत्येक स्कूल बस में प्राथमिक उपचार पेटी एवं अग्निशमन यंत्र की व्यवस्था होगी। प्रत्येक स्कूल बस में प्राथमिक उपचार, विद्यार्थियों की सुरक्षा एवं आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए एक प्रशिक्षित परिचायक होगा, जो बच्चों को उतारने एवं चढ़ाने में सहायता करेगा। स्कूल बस का संचालन ऐसे चालक द्वारा किया जायेगा, जो स्थायी ड्राइविंग लाईसेंस धारण करता हो तथा जिसके पास भारी यान चलाने के लिए न्यूनतम पांच वर्ष का अनुभव हो। ऐसे चालक नियोजित नहीं किये जायेंगे जिनका सड़क पर लेन व्यवस्था का उल्लघंन करने, सिगनल लाईट का उल्लघंन करने या अनाधिकृत व्यक्तियों को वाहन में चढ़ाने पर वर्ष में दो बार से अधिक चालान किया गया हो। ऐसा चालक नियोजित नहीं किया जायेगा जिसका एक बार भी अनियंत्रित गति, नशे की हालत में वाहन चलाने तथा खतरनाक ढंग से वाहन संचालन करने के अपराध में चालान किया गया हो। स्कूल संस्थान द्वारा वाहन के चालक से इस आशय का शपथ पत्र लिया जायेगा।स्कूल बस में विद्यार्थियों को छोड़कर सिर्फ सुरक्षा उपायों को चेक करने हेतु किसी विद्यार्थी को अभिभावक अथवा शैक्षणिक संस्थान के शिक्षक को ही ले जाने की अनुमति होगी। अन्य किसी व्यक्ति को ऐसे बस में ले जाने की अनुमति नहीं होगी। प्रत्येक स्कूल बस में सीट के नीचे बस्ता रखने का पर्याप्त स्थान होगा। स्कूल बसों का संचालन विहित गति सीमा के भीतर किया जायेगा तथा प्रत्येक बस में स्पीड गवर्नर लगाया जायेगा। प्रत्येक स्कूल बस के दाहिनी ओर एक आपातकालीन दरवाजा होगा, जो हमेशा अच्छी स्थिति में बंद रहेगा, जिसे केवल आपातकालीन स्थिति में ही खोला जायेगा। स्कूल बस का प्रवेश द्वार विश्वसनीय लॉकिंग सिस्टम से युक्त होगा। स्कूल बस की खिड़कियों में फिल्मयुक्त रंगीन कांच अथवा पर्दे नहीं लगाये जायेंगे। ऐसे सुरक्षा कांच, जो मोटरयान नियम, 1989 के नियम 100 में प्रावधनित है, लगाये जायेंगे। स्कूल बसों में प्रेशर हार्न नहीं लगाया जायेगा। रात्रि में संचालन करने पर, स्कूल बस के अंदर नीले रंग का बल्ब लगाया जायेगा। स्कूल बसों का नियमित रूप से रखरखाव किया जायेगा और स्वच्छ रखा जायेगा। संविदा वाहन के लिए, मोटर यान अधिनियम, 1988 (1988 का से 59) की धारा 56 के अंतर्गत वैध उपयुक्तता प्रमाण पत्र प्राप्त करना होगा। प्रत्येक स्कूल बस में वैद्य बीमा प्रमाण पत्र प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र एवं कर जमा होने का प्रमाण पत्र रखना होगा। कोई भी स्कूल बस 12 वर्ष से अधिक पुरानी नहीं होगी।
: खून से लथपथ अज्ञात व्यक्ति का मिला शव , हत्या की आशंका
Thu, May 16, 2024
मनेन्द्रगढ़।एमसीबी।ग्राम पंचायत चनवारीडांड स्थित डिपो के पीछे (मौहरीपारा ग्राउंड समीप) में एक युवक का शव मिला, ग्राम में शव मिलने से दहशत फैल गया,यह मनेंद्रगढ़ कोतवाली क्षेत्र का मामला है, पुलिस में सूचना दी गई है जल्द ही पुलिस करेगी खुलासा ।
: छ्ग का नागलोक: रामायण,महाभारत काल से जुड़ी हैँ दँत कथाएं
Wed, May 15, 2024
नागलोक छत्तीसगढ़ के जशपुर में स्थित है। इसे तपकरा के नाम से जाना जाता है।आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है। इसकी गिनती आज भी पिछड़े इलाकों में होती है। देश में सांपों की सबसे ज्यादा प्रजातियां पाई जाती हैं। बताया जाता है कि इस जगह सांपों की करीब 70 प्रजातियां हैं,कई प्रजातियों के सर्प विषैले हैं।जंगलों से घिरा जशपुर का तपकरा इलाका जादुई तिलस्म से भरा हुआ है। यहां पर स्थित पहाड़ पर एक गुफा है। जो करीब 400 मीटर दूर तक फैली है। कोतेविरा कपाट द्वार या पाताल द्वार कहा जाता है।लोगों का मानना है कि जो भी इस गुफा में गया वापस नहीं लौटा, इसीलिये गुफा के मुख्यद्वार को एक बड़ी चट्टान से बंद करके रखा गया है। तपकरा क्षेत्र में शिवजी का प्राचीन मंदिर भी है। बताया जाता है कि पहले यह दंडकारण्य वन में पड़ता था। लंकापति रावण की बहन शूर्पनखा,शिव की पूजा करती थीं। वनवास के दौरान श्रीराम,सीता के साथ ईव नदी के किनारे बने इसी मंदिर में शिव की आराधना करते थे। मान्यताओं है कि पातालद्वार से ही नागराज आकर शिव की पहरेदारी करते थे। राम के जाने के बाद भी शिव के पास नाग पहरा देते हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक आज भी एक काला नाग,मंदिर, शिवलिंग की पहरेदारी करते हुये भी दिख ही जाता है। नागलोक का महाभारत काल से भी रिश्ता है। कहा जाता है कि द्वापरयुग में जब भीम छोटे थे, दुर्योधन ने धोखे से उन्हें जहरीली खीर खिला दी थी मरणासन्न अवस्था में बहते हुये ईव नदी में आ गए थे, जहां नदी में स्नान कर रही नाग कन्याओं की नजर उन पर पड़ी। वे भीम को इलाज के लिए नागलोक ले गई, बाद में इंसानों का प्रवेश नागलोक में वर्जित कर दिया गया। बताया जाता है कि भीम के स्वस्थ हो जाने पर नागलोक के राजा से मिलें।उन्होंने भीम कोहजार हाथियों का बल दिया। इसी के चलते भीम अधिक बल शाली हो गए थे। प्राचीनग्रंथों के अनुसार नागलोक के राजा भीम के बाद किसी अन्य इंसान को उनके लोक में नहीं आने देना चाहते थे। इसीलिये दूसरों के प्रवेश पर रोक लगा दी। अगर गलती से अगर कोई उनके लोक पहुंच जाता है तो वो वापस कभी लौट ही नहीं पाता है। जशपुर जिले के कोतेबीरा धाम में नागलोक की कई कहानियाँ प्रचलित हैं। यहां के लोगों कि मान्यता है कि यहां स्थित कोतेबीरा धाम से सीधे नागलोक का रास्ता है।लोग इस गुफा को ही नागलोक का प्रवेश द्वार कहते हैं। लोगों की मानें तो प्राचीन समय में यहां देवदूत रहा करते थे, कुछ लोगों ने लालच में आकर उनसे सोने चांदी के बर्तन छीनने का प्रयास किया तो,देवता सर्प का रूप धारण कर इसी मार्ग से पाताललोक चले गये....? इस क्षेत्र में किंग कोबरा, करैत जैसे विषधर सांपों की संख्या ज्यादा है वहीं विचित्र प्रजाति के सांप ग्रीनपीट वाइपर, सरीसृप प्रजाति के जीव,ग्रीन कैमे लियन, सतपुड़ा लेपर्ड और लिजर्ड भी यहां पाए जाते हैं। ग्रीनपिट वाइपर कानाम ट्रिमरसेरसस सलजार है,जो छग के अलावा अरुणाचल प्रदेश में ही पाया जाता है, इसका विष कोबरा की अपेक्षा धीमा असर करता है,इस सांप का उल्लेख हॉलीवुड फिल्मों के हैरी पॉटर श्रृंखला की में किया गया है। जशपुर जिले में बाकि जिलों की तुलना में सबसे ज्यादा सांप पाये जाते हैं। दूसरे जिलों की अपेक्षा यहां सर्पदंश से ही सबसे ज्यादा मौतें होती हैं। जशपुर के फरसाबहार तहसील से लगे इलाकों को नागलोक के नाम से जाना जाता है। यहां 70 तरह के जहरीले सांप पाये जाते हैं। यहां के कई गाँवों को लोग सापों की बस्ती के नाम से भी पुकारते हैं। यहां अलग- अलग प्रकार के जहरीले सांप पाए जाते हैं। सर्पदंश की घटना यहां आम बात है। जिले में बाकि जिलों की संख्या में स्नैक कैचरों का दावा है कि यहां इतने जहरीले सांप हैं कि अगर किसी इंसान को काटें तो चंद मिनटों में मौत हो जाए।जशपुर जिले के फरसाबहार तहसील से लगे क्षेत्रों को नागलोक के नाम से जाना जाता है। छ्ग को ओडिशा से जोड़ने वाली स्टेट हाईवे के किनारे स्थित तपकरा और आसपास के गांव में अधिक संख्या में किंग कोबरा, करैत जैसे विषैल सर्प पाये जाते हैं।