देश की सबसे बड़ी पंचायत लोकसभा में कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने लोस अध्यक्ष ओम बिड़ला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया है, लोस में संख्या बल के चलते यह धारासायी होगा यह तय है पऱ जनता के सामने लोस अध्यक्ष के पक्षपाती तरीके से संचालन की बात लाने में विपक्ष सफल तो हो जाएगा? भारत में पहली बार राष्ट्रपति के धन्यवाद प्रस्ताव पऱ पीएम या नेतापक्ष नहीं बोले.. कारण रहा लोस अध्यक्ष...? उन्होंने सँसद में कहा कि कांग्रेस की कुछ महिला सांसद पीएम पऱ हमला कर सकती थीं, इस लिये मैंने पीएम को लोस में सम्बोधन से मना किया,गजब है...56 इंच का सीना.. विदेश के कई देश मोदी से थर -थर काँपते हैं, सँसद में बहुमत... सेना उनकी, पुलिस उनकी, सीबीआई, ईडी, रा उनकी और संसद में ही अ-सुरक्षित हैं पीएम मोदी..!और यह कह कौन रहे हैँ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ? सिर्फ़ “ज़रूरी” नहीं था, यह अनिवार्य था। जब लोकसभा अध्यक्ष खुले तौर विपक्ष को अपमानित करते हैँ, सदन को सत्तापक्ष का एक्सटेंशन बना देते हैँ, और संसदीय परंपराओं को रबर-स्टैम्प की तरह इस्तेमाल करते हैँ? अविश्वास प्रस्ताव लोकतंत्र का शोर नहीं,उसकी आख़िरी दस्तक होता है। “पीएम को विपक्षी सांसदों से खतरा है” यह वाक्य खुद में स्वीकारोक्ति है।खतरा विपक्ष से नहीं,खतरा सवालों से है, खतरा बहस से है, खतरा जवाबदेही से है और जब सत्ता को सवालों से डर लगने लगे, तब स्पीकर का काम सत्ता की ढाल बनना नहीं होता..? लेकिन यही भूमिका निभाई गई।अविश्वास प्रस्ताव किसी व्यक्ति के ख़िलाफ़ नहीं,संस्था गत पतन के ख़िलाफ़ है।अगर संसद में विपक्ष ही असुरक्षा बन जाए, तो फिर लोकतंत्र एक तमाशा है, और यह प्रस्ताव उस तमाशे का पर्दा फाड़ने की कोशिश....नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी पूर्व सेनाध्यक्ष नरवणे की एक पुस्तक (छपी है या नहीं ) पऱ बोलते हैं तो लोस अध्यक्ष नियमों का हवाला देकर बोलने से रोकते हैं पऱ भाजपा के एक सांसद निशिकांत दुबे ने कुछ पुस्तकों का हवाला देकर देश के पहले पीएम जवाहरलाल नेहरू, पहली महिला पीएम इंदिरा गाँधी की चरित्र हत्या का प्रयास करते हैं पर आसन्दी चुप रहती है यह क्या है.....?
इतिहास में स्पीकर के खिलाफ
कितने अविश्वास प्रस्ताव....?
लोकसभा के इतिहास में स्पीकर के खिलाफ अब तक 3 प्रमुख अविश्वास प्रस्ताव लाए गए हैं, कोई भी सफल नहीं हो पाया है। 0 पहला मामला 18 दिसंबर 1954 का है, तब स्पीकर जीवी मावलंकर के खिलाफ प्रस्ताव आया,लेकिन बहस के बाद सदन ने इसे खारिज कर दिया। 0 दूसरा 24 नवंबर 1966 में हुकमसिंह के खिलाफ लाया गया, जो 50 सदस्यों के समर्थन की कमी के कारण गिर गया। 0 तीसरा 15 अप्रैल 1987 में बलराम जाखड़ के विरुद्ध था, बहस के बाद अस्वीकार कर दिया गया। 0 इसके अलावा 1967 में डॉ. नीलम संजीव रेड्डी, 2001 में जीएमसी बाल योगी, 2011 में मीरा कुमार, 2020 में ओम बिरला के खिलाफ नोटिस की चर्चाएं जोरों पर रहीं, लेकिन ये कभी अमल में नहीं आए...।
नक्सलवाद:केंद्र का
20% अधिक बजट..
केंद्र सरकार ने बजट 2026 में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा, बुनियादी ढांचे पऱ होने वाले खर्च के लिये 3610.80 करोड़ का फंड आबँटित किया जो पिछली बार की तुलना में 20%अधिक है।केंद्र सरकार ने नक्सलवाद समाप्त करने 31 मार्च 2026 की समय सीमा तय की है।यह रकम नक्सली प्रभावित रहे क्षेत्रों में सुरक्षा,नई सड़क सहित बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध करने पऱ खर्च होगा।यहां बताना जरुरी है की पिछले 10 वर्षों में नक्सली 53% तक कम हुई है।हाल ही में गृह मंत्री अमित शाह ने रायपुर में नक्सल प्रभावित पड़ोसी राज्यों के पुलिस मुखियाओं की बैठक लेकर 31 मार्च 26 तक नक्सलवाद को समाप्त करने पऱ बल दिया और बचे नक्सलियों से आत्मसमर्पण की भी अपील की है।
भूपेश,गोगोई पऱ 500
करोड़ ₹ का मानहानि केस..
असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता,पूर्व सीएम भूपेश बघेल, कांग्रेस नेता जितेंद्र सिंह और गौरव गोगोई के खिलाफ 500 करोड़ ₹ का मानहानि केस दर्ज कराया है। सरमा ने एक्स पर पोस्ट कर जानकारी दी कि इन नेताओं ने प्रेस कान्फ्रेंस के जरिए उन पर जान बूझकर झूठे, अपमान जनक आरोप लगाए हैं।जानकारी के मुताबिक विवाद की शुरुआत 4 फरवरी को हुई, जब असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सीएम के परिवार ने लगभग 12 हजार बीघा (करीब 3,960 एकड़) सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किया है। इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए सरमा ने कानूनी कार्रवाई का रास्ता चुना है।
और अब बस....
0बस्तर पंडुम 2026 में राष्ट्रपति मुर्मु बोलीं-'छत्तीसगढ़ आकर हमेशा घर जैसा अपनापन महसूस होता है '।
0बस्तर नक्सलमुक्ति की ओर बढ़ रहा है, लेकिन आईईडी बम सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है। सुरक्षा बलों और निर्दोष ग्रामीणों की जान लेने वाला यह खतरा शांति की राह में बड़ी चुनौती बना है।
0बस्तर में नक्सल विरोधी अभियानों से माओवादियों की कमर टूट चुकी है,4 साल में 256 नक्सली मारे गए और हिंसा के मामलों में बड़ी गिरा वट आई है। सरेंडर और गिरफ्तारियों से नक्सली नेटवर्क कमजोर हुआ है।
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