Advertisment

26th June 2026

BREAKING NEWS

तेलनदी से ढोर्रा बांध जोड़ो अभियान चलाने की जरूरत है, हो सके तो क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को सत्याग्रह आंदोलन करना चाहिए

जांच से खुल सकते हैं बड़े राज" "करोड़ों की स्वास्थ्य योजनाओं पर सवाल: दवा वितरण या दवा विनाश?"

नारी राग-रंग महोत्सव 2026 का भव्य शुभारंभ

प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह विफल- स्वप्निल सिन्हा

हर्षोल्लास के साथ मनाया गया शाला प्रवेश उत्सव

: छेरछेरा पर्व ,रायपुर में कांग्रेस भवन का निर्माण, 1938 में सरदार पटेल ने किया था उद्घाटन

Admin Sun, Jan 12, 2025

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस का गठन सन 1906 में सी एम ठक्कर ने किया था,छेरछेरा पुन्नी1929को कांग्रेस भवन की स्थापना का प्रयास शुरू हुआ और 1938 में सरदार वल्ल्भ भाई पटेल ने भवन का उद्घाटन किया था यानि 92 साल की उम्र हो चुकी है इस भवन की, महात्मा गांघी, पं. जवाहरलाल नेहरू,डॉ राजेंद्र प्रसाद आदि भी आ चुके हैं,यह बात और है कि अब यहां जिला कॉंग्रेस का कार्यालय है,छ्ग बनने के बाद शंकरनगर चौक में नया कांग्रेस ऑफिस राजीव भवन बन चुका है।छत्तीसगढ़ी संस्कृति में दान मांगने की अनोखी परंपरा सदियों से चली आ रही है। आधुनिक दौर में दान मांगने की यह परंपरा कायम है। पौष पूर्णिमा के दिन हर गांव में बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं दान मांगने घर- घर जाते हैं। मांगने आने वालों को खाली हाथ नहीं लौटाया जाता..घर के मुखिया अपने कोठार में रखे गए धान,गेहूं अन्य फसलों में से कुछ न कुछ दान अवश्य करते हैं, 1929 में कांग्रेसियों ने घर- घर जाकर दान मांगा था, दान में मिले धान को बेचने और अन्य सहयोग से छोटा पारा स्थित कांग्रेस भवन की नींव रखी गई थी,1938 में सरदार वल्लभ भाई पटेल ने भवन का उद्घाटन किया था। वैसे बैरिस्टर सी.एम. ठक्कर ने 1906 में रायपुर शहर में कांग्रेस की शाखा की स्थापना की थी, सुंदर लाल शर्मा समेत क्षेत्र के अन्य राजनेता भी कांग्रेस सदस्य बने थे।यहां यह भी बताना जरुरी है कि छत्तीसगढ़ में असहयोग आंदोलन -1920,राष्ट्रीय झण्डा सत्याग्रह-1923, स्वराजदल, बीएन सी मिल मजदूर आंदोलन राजनांदगांव,रोलेक्ट/ रॉलेट एक्ट1919 सूरत विभाजन 1907, बंगाल विभाजन के वक़्त प्रांत राजनीतिक सम्मेलन 1905 होमरूल लीग आंदोलन हुआ था। छेरछेरा पर्व पौष पूर्णिमा के दिन छग में बड़े ही धूमधाम, उल्लास से मनाया जाता है,इस साल 2025 में छेरछेरा 13 जनवरी को मनाया जाएगा, इसे छेरछेरा पुन्नी या छेरछेरा तिहार भी कहते हैं, इसे दान लेने-देने का पर्व मानते हैँ।मान्यता है कि इस दिन दान करने से घरों में धन-धान्य की कोई कमी नहीं होती, इस दिन छत्तीसगढ़ में बच्चे और बड़े, सभी घर-घर जाकर अन्न का दान ग्रहण करते हैं और युवा डंडा नृत्य करते हैं। सभी कहते हैं छेरछेरा... ’माई कोठी के धान ला हेर हेरा’, इस पर्व को मनाते बच्चों और बड़े,बुजुर्गों की टोलियां एक अनोखे बोल से दान मांगते हैं, दान लेते समय बच्चे ‘छेर छेरा माई कोठी के धान ला हेर हेरा’ कहते हैं और जब तक घर की महिलाएं अन्नदान नहीं देती तब तक वे कहते रहेंगे... ‘ अरन बरन कोदो दरन, जबे देबे,तबे टरन’.. इसका मतलब ये होता है कि बच्चे कह रहे हैं,मां दान दो,जब तक दान नहीं दोगे, तब तक हम नहीं जाएंगे..!

विज्ञापन

जरूरी खबरें