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: हिन्दी ही हमारी संस्कृति, विरासत की रीढ़ है हमें इसे सुदृढ़ बनाए रखना है- डॉ. विनय कुमार शुक्ल

Admin Tue, Jan 14, 2025

मनेन्द्रगढ़। एमसीबी। हर भाषा अपने आप में एक पहचान होती है। हिंदी भी हमारी पहचान है, हमारे विचारों का माध्यम है और हमारे देश की संस्कृति की आईना है। विगत दिनों शासकीय मां महामाया महाविद्यालय, खड़गवां में "विश्व हिन्दी दिवस" पर आयोजित एकल व्याख्यान कार्यक्रम "राष्ट्रीय चेतना के विकास में हिंदी की भूमिका" में मुख्य वक्ता के रूप में अपना उद्बोधन देते हुए आलोचक डॉ विनय कुमार शुक्ल ने कहा कि हिन्दी ही हमारी संस्कृति, विरासत की रीढ़ है हमें इसे सुदृढ़ बनाए रखना है महाविद्यालय के डाक्टर प्रेमचंद मौर्य एवं आई.क्यू.ए.सी. के शत्रुघ्न सोनवानी के संयोजकत्व में आयोजित कार्यक्रम में स्वागत वक्तव्य देते हुए डॉ अजय कुमार सोनी ने कहा कि हिंदी न केवल भारत की सांस्कृतिक धरोहर है, बल्कि यह विश्व मंच पर भारत की पहचान को भी सशक्त बनाती है। इस कार्यक्रम का संचालन करते हुए वाणिज्य विभाग के मनीष कुमार शुक्ल ने कहा कि हिंदी ने राष्ट्रीय एकता और अखंडता की नींव रखी है। धन्यवाद ज्ञापित करते हुए हिंदी विभाग के युवा कथाकार डॉ प्रेमचन्द्र मौर्य ने बताया कि आधुनिक काल के कवियों ने राष्ट्रीय चेतना से युक्त कविताओं के ज़रिए जनमानस में एक सामूहिक चेतना का निर्माण किया। इस कार्यक्रम में संस्था प्राचार्य डॉ आरती तिवारी,रामानुज प्रताप सिंहदेव महाविद्यालय बैकुंठपुर राजनीति विज्ञान के विभागाध्यक्ष डॉ गौरव कुमार मिश्र,डॉ अमर्त्य शकर त्रिपाठी, डॉ अंकिता पटेल, प्रणव कर, अशोक कुमार यादव, कमलेश कुमार नेटी और पर्याप्त संख्या में परास्नातक एवं स्नातक के छात्र-छात्राओं की उपस्थिति रही।

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