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: अगर मौजें डुबो देतीं तो कुछ तस्कीन हो जाती... किनारों ने डुबोया है मुझे इस बात का ग़म है...

Admin Fri, Sep 13, 2024

हाल ही में मेरे एक मित्र आईपीएस ने प्रेमचंद के उपन्यास 'सेवा सदन' की एक प्रति भेंट की है, यह उपन्यास पढ़कर वर्तमान स्थिति से तुलना करने पर पाया कि वर्तमान हालात की 106 साल पहले मुंशी प्रेमचंद ने कैसे कल्पना कर ली थी..? आज के हालात फिर आजादी के पहले जैसे ही होते जा रहे हैं, प्रेमचंद ने सामाजिक सरोकारों से ओत-प्रोत उपन्यास 'सेवा सदन' की रचना 106 पहले 1918 में की थी। उर्दू में भी 'बाजार-ए- हुस्न' नाम से 1919 में भी छपा था। भारतीय राजनीति में जो सम्मान महात्मा गांधी का है, वही मुकाम हिंदी कथा साहित्य में उपन्यास सम्राट प्रेमचंद का है। वाल्मीकि, उपमागुरु कालिदास,महाकवि तुलसी दास जैसे महान कालजयी रचनाकारों के समान सामाजिक सरोकारों के लेखक प्रेमचंद ने भारत के जन मानस को प्रभावित किया। वे मानते थे कि साहित्य समाज का दर्पण होने के साथ दीपक का भी कार्य करता है, जिसका उद्देश्य अन्याय , उत्पीड़न,आडंबर के अंधेरे को मिटाकर, सद्भावना, सदाचार,साहस,समानता,सत्य के मार्ग को आलोकित करना है। सामाजिक सरोकारों से ओत- प्रोत उप न्यास 'सेवा सदन' में प्रेमचंद ने नारी पराधीनता वेश्या जीवन, दहेज प्रथा, मध्यम वर्ग की आर्थिक- सामाजिक समस्याओं, जातिप्रथा,धर्म के ठेकेदारों को चित्रित कर उसका यथासंभव समाधान भी प्रस्तुत किया है। ईमानदार थानेदार कृष्णचंद्र की दो बेटियां सुमन और शांता हैं। दहेज की शर्त पूरी किये बिना कोई भी अच्छा रिश्ता सुमन को मिल नहीं पाता है कम आमदनी के कारण सुमन के पिता दहेज जुटाने के लिए रिश्वत लेनी पड़ी है। रिश्वत का भेद खुलने पर थानेदार को जेल हो जाती है, परिवार संकट में आता है। मजबूरी में ही सुमन का विवाह मामूली आमदनी वाले विधुर गजाधर से हो जाता है। बेमेल विवाह और गरीबी के कारण पति-पत्नी के बीच मन- मुटाव शुरू हो जाता है और एक दिन रात को देर से लौटने पर पति ने सुमन पर दुराचार का आरोप लगाकर घर से निकाल दिया। अब सुमन को जीवन में अकेलापन,अपमान ,तिरस्कार, विवशता के कांटें चुभने लगते हैं, सुमन कस्बे की वेश्या भोली की शरण लेती है, स्वयं वेश्या बन जाती है। लेखक प्रेमचंद भाषा-शैली के साथ -साथ मनोविज्ञान के जादूगर थे। आधे पागल जैसी दशा में सुमन के पिता जेल से छूट ते हैं। उनको दुख था, माया भी हाथ न आई, पद- प्रतिष्ठा से भी हाथ धोना पड़ा।जब यह पता चला कि बड़ी बेटी सुमन वेश्या बन गई है,तो वह नदी में डूबकर आत्महत्या कर लेते हैं। प्रेमचंद की दूरदर्शिता काबिले तारीफ है। आज से 106 साल पहले धर्म के ठेकेदारों को बेनकाब करते हुए सेवा सदन में लिखा- 'आजकल धर्म तो धूर्तों का अड्डा है,इस निर्मल सागर में एक से एक मगरमच्छ पड़े हुए हैं। भोले -भाले भक्तों का निगल जाना उनका काम है।लंबी जटाएं, तिलक,लंबी दाढ़ियां महज पाखंड हैं, लोगों को धोखा देने के लिए हैं'। प्रेमचंद का यह वक्तव्य 106 बाद भी सामयिक है।हरियाणा- गुजरात के दो चर्चित रसूखदार दोहरे - दोगले चरित्र वाले बाबाओं को जेल इसका सबल प्रमाण है,सेवा सदन की मुख्य समस्या भारतीय नारी की पराधीनता है।नारी- समाज का सबसे दलित अंगराष्ट्रीय पराधीनता,घरेलु दासता, दोनों से पिसती हुई स्वाधीनता के लिए हाथ फैलाने लगी थी। प्रेमचंद ने सबसे पहले इस परिवर्तन को देखा,स्वागत किया,उसे बढ़ावा दिया। 'सेवा सदन' के माध्यम से प्रेमचंद केवल सामाजिक कुरीतियों और आडंबरों से ही रूबरू नहीं करते,बल्कि यथायोग्य समाधान भी प्रस्तुत करते हैं। एसपी कांफ्रेंस:गृहमंत्री को आमंत्रण नहीं था क्या....? 13 नवम्बर 2013 को सीएम ने कार्यभार सम्हाला था, 9 महीने पूरा होने के दिन ही एसपी कॉन्फ्रेंस लेकर अपनी सरकार की नीति स्पष्ट की, कार्यवाही के भी कड़े निर्देश दिये,कुछ आईजी रेंज की पुलिसिया कार्यवाही की तारीफ की तो कुछ को सुधरने की भी हिदायत दी। दुर्ग रेंज (जिस में गृहमंत्री का गृह जिला भी आता है) कार्यप्रणाली पर असंतोष भी प्रकट किया, वहीं गृहमंत्री के गृह जिले कवर्धा के एसपी को भी एक मामले में कहा कि ऐसा नहीं होना था.....? उन्होंने बिलासपुर पुलिस रेंज की जरुर तारीफ की। इस बैठक में पहली बार एसपी से बैठक में ही चर्चा की,उनकी समस्याओँ की भी जानकारी ली, सबसे बड़ी चर्चा डिप्टी सीएम तथा गृहमंत्री विजय शर्मा की गैर मौजूदगी चर्चा में रही..? वैसे अमूमन ऐसे आयोजन में गृहमंत्री की मौजूदगी रहती है,पहले जारी कार्यक्रम में गृहमंत्री का सम्बोधन भी होना था पर बाद में उन्हें आमंत्रित ही नहीं किया गया....? अबूझमाड़ में सेना का युद्धाभ्यास रेंज बनेगा... बस्तर को नक्सलियों के आतंक से मुक्ति दिलाने के नाम पर छ्ग सरकार ने अबूझमाड़ के जंगल में सेना के युद्धाभ्यास रेंज बनाने 54, 543 हेक्टेयर भूमि अधि ग्रहण करने नारायणपुर के कलेक्टर को पत्र लिखा है।अबूझमाड़ को नक्सलियों का बड़ा "गढ़" माना जाता है। वैसे नारायणपुर कलेक्टर को पहले भी 13 सितंबर 2017, 21नवम्बर 17,फिर 17 फरवरी 21 को भूमि हस्ताँतरण के लिये पत्र दिया गया है,वर्तमान पत्र में उसका भी उल्लेख है।सेना को इस भूमि हस्ताँतरण का प्रस्ताव पिछले 7 सालों से लंबित है,देखना है इस बार क्या होता है?सेना का उपयोग नक्सली उन्मूलन हेतु नहीं होगा पर नक्सलीगढ़ अबूझमाड़ में सेना के युद्धा भ्यास से तो नक्सली गति विधियों पर एक तरह से दबाव बनेगा यह तय है। एक छत्तीसगढ़िया पूर्व आईएएस ऐसा भी.... मप्र में व्यापम घोटाला और छग में पीएससी भर्ती में घोटाला की जमकर चर्चा है। ऐसे में एक पूर्व आईए एस की चर्चा जरुरी है।मूल छत्तीसगढ़िया पूर्व आईएएस बीएल ठाकुर,सरकारी नौकरी के दौरान मप्र में 19 91-92 में माध्यमिक शिक्षा मण्डल के सचिव रहे,छ्ग राज्य बनने के बाद 2008 से 2011 तक 3 साल,पी एससी चेयरपर्सन भी रहे... डिंडोरी (मप्र) तथा छ्ग के धमतरी के कलेक्टर भी रहे, 74 में साइंस कॉलेज रायपुर से एमएससी करने के बाद कुछ जगह नौकरी की फिर 76 बैच के डिप्टी कलेक्टर बने, बालाघाट,राजनांदगाँव दंतेवाड़ा,जगदलपुर में एसडीएम, के अलावा खनिज, गृह निर्माण मण्डल, विद्युत मण्डल आदि में भी कार्य किया। छ्ग पीएससी में चेयरमेन पर्सन बनने एक साल पहले ही अनिवार्य सेवा निवृति लेकर वहाँ 3 साल कार्य किया। वहाँ से कार्यमुक्त होकर अब झलमला (बालोद) में खेती- बाड़ी में लगे हैं। मेरी उनसे मुलाक़ात रिटायर्ड एडीजी आर सी पटेल ने कराई थी, उनके परिवार की शादी में हम ज़ब गाँव गये थे, आईपीएस बीबीएस ठाकुर (आईपीएस प्रफुल्ल ठाकुर के बड़े भाई) भी आये थे, ग्रामीण माहौल में पत्तों का मंडप देखकर मुझे ठाकुर साहब की सादगी पर फ़ख्र ही हुआ। खैर हाल ही में हमारे मित्र देवघर महंत ने गांव जाकर ठाकुर साहब से मुलाक़ात की। मुझे लगा कि हाल ही में जिस तरह आईएएस जेल में हैँ, कुछ जाने की तैयारी में हैं,लाखों -करोड़ों की सम्पति के मालिक बन रहे हैं इस माहौल में सादगी पसंद रिटायर आईएएस की चर्चा करना जरुरी था....! और अब बस.... 0 छ्ग के भाजपा के 2 सांसदों बृजमोहन अग्रवाल,विजय बघेल को अपने ही सीएम को पत्र लिखने की जरुरत क्यों पड़ी...? 0भूपेश सरकार के मंत्री रहे मो. अकबर के खिलाफ एफ आई आर हो गई है, अब शिव डहरिया की बारी है..? 0 सरगुजा में मां के मोबाईल देखने से मना करने पर एक बेटी ने आत्महत्या कर ली है। 0छत्तीसगढ़ के इंद्रावती टायगर रिजर्व के कोर एरिया के अंतर्गत 76 गांवों से विस्थापन में प्रथम चरण में 21 गांवों का चयन किया गया है।

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