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21st May 2026

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धड़ल्ले से चल रहे अवैध ईंट भट्ठे… जंगलों से कट रहे पेड़… और जिम्मेदार विभागों की चुप्पी!

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तहसील मुख्यालय के आसपास : धड़ल्ले से चल रहे अवैध ईंट भट्ठे… जंगलों से कट रहे पेड़… और जिम्मेदार विभागों की चुप्पी!

Praveen Nishee Wed, May 20, 2026

अमलीपदर। गरियाबंद। अमलीपदर क्षेत्र खासकर सूखा तेल नदी के किनारे में लाल ईंट भट्ठों के संचालन को लेकर अब सवाल तेज हो गए हैं। आरोप है कि प्रतिबंध और नियमों के बावजूद दर्जनों ईंट भट्ठे खुलेआम संचालित हो रहे हैं, जिनमें भारी मात्रा में लकड़ी जलाकर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। आखिर किसके संरक्षण में चल रहा है यह कारोबार?

गरियाबंद जिले के अमलीपदर क्षेत्र में इन दिनों अवैध ईंट भट्ठों का कारोबार चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि तहसील मुख्यालय के आसपास और ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में ईंट भट्ठे संचालित हो रहे हैं, जहां लकड़ियों का उपयोग कर ईंट पकाई जा रही है।

बताया जा रहा है कि इन भट्ठों में जंगलों और खेती की जमीनों से काटे गए पेड़ों को जलाया जा रहा है। पर्यावरणविद लगातार मौसम असंतुलन और बढ़ती गर्मी के पीछे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई को बड़ा कारण बता रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद क्षेत्र में लकड़ी की खपत लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि गर्मी में अत्यधिक तापमान, बारिश के मौसम में कम वर्षा और अचानक बदलते मौसम जैसी स्थितियां अब आम होती जा रही हैं। इसके पीछे पेड़ों की कमी और अवैध कटाई को प्रमुख वजह माना जा रहा है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब लाल ईंट भट्ठों को लेकर सख्त नियम और प्रतिबंध लागू हैं, तब भी अमलीपदर क्षेत्र में कथित रूप से 50 से अधिक भट्ठे कैसे संचालित हो रहे हैं?

लोगों के बीच यह चर्चा भी तेज है कि आखिर इन अवैध कारोबारियों को संरक्षण कौन दे रहा है।

जब इस विषय पर तहसीलदार अमलीपदर गेंद लाल साहू को सवाल किया गया था उनका कहना था उन्हें इस विषय पर किसी तरह का सूचना प्राप्त नहीं है पता कर बताएंगे ।

आरोप यह भी है कि ईंटों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी कर आम लोगों से मनमाना पैसा वसूला जा रहा है। जिन ईंटों की कीमत पहले काफी कम थी, वही अब कई गुना अधिक दाम पर बेची जा रही हैं।

हैरानी की बात यह भी है कि तहसील और वन विभाग की मौजूदगी के बावजूद अब तक किसी बड़ी कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या विभागीय उदासीनता के कारण यह कारोबार फल-फूल रहा है, या फिर इसके पीछे किसी प्रभावशाली संरक्षण की भूमिका है।

अब देखना होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले को गंभीरता से लेकर जांच और कार्रवाई करता है या फिर यह अवैध कारोबार इसी तरह जारी रहेगा।

अवैध ईंट भट्ठों और पर्यावरण को हो रहे नुकसान को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या जिम्मेदार विभाग इस मामले में सख्ती दिखाएंगे, या फिर अवैध कारोबार यूं ही चलता रहेगा।

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