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प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह विफल- स्वप्निल सिन्हा

: आसान नहीं है अतीत को भी भुलाना..... कुरेदता रहता है जख्मोँ को क्यों जमाना...

Admin Fri, Jul 19, 2024

जब कांग्रेस आपातकाल के लिए कई बार माफी मांग चुकी है, तो फिर 'संविधान हत्या दिवस ' मनाने के निर्णय का क्या औचित्य है ...? पहले लोकसभा में निंदा प्रस्ताव, फिर राष्ट्रपति के अभिभाषण में आपात काल का उल्लेख किया गया था। जाहिर है यह सिर्फ द्वेषपूर्ण राजनीति है। अनैतिकता इसके मूल में है। आपातकाल के बाद जनता ने इंदिरा को बाहर कारास्ता दिखाया तो उनकी माफी को पश्चाताप के बाद गले भी लगाया। यदि 1975 में आपातकाल नहीं लगा होता तो शायद देश को विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ता...! आपात काल का विरोध करने वाले असहमत हो सकते हैँ..., लेकिन उस समय की परिस्थितियों पर गौर करें I आपातकाल के नायक जेपी ने दिल्ली की विशाल जनसभा में पुलिस बलों का आव्हान किया था कि सरकारी आदेशों/निर्देशों को मानने से इंकार कर देँ, यदि आपातकाल लगाकर गिरफ्तारियां न की जाती..? सशस्त्र बल यदि सरकार के निर्देशों को जेपी (जय प्रकाश)के आव्हान के अनुरूप मानने से इंकार कर देता (उस समय जेपी की लोकप्रियता और उनके विराट व्यक्तित्व को देख जिसकी संभावना से इँकार नहीं किया जा सकता था) तो देश कितनी अराजकता के बीच होता,क्या इसका अनुचित लाभ कुछ ही दिनों पूर्व में पराजित, पाकिस्तान,अमेरिका तथा चीन जैसे देश नहीं उठाते ..? क्या जेपी, दूसरे नेता इस स्थिति को नियंत्रित कर सकते थे आज सरकार में बैठे लोग आपातकाल को कोस रहे हैँ यदि उनके खिलाफ कोई उस तरह का विद्रोह करे तो खिलाफ सख्त कदम नहीं उठाएंगे ...? आज तो सोशल मीडिया पर इनके खिलाफ एक कमेन्ट भी कोई कर दे तो उसे बंदी बनाया जा रहा है! आपात काल पर अपनी बाहें चढ़ाने वाले नेता जो आज उसी के लिए पेंशन ले रहे हैं क्यों ? वर्तमान सरकार के खिलाफ जेपी की तरह का विद्रोह कर अपने को जेलों से बाहर पा सकते हैं ...? वैसे उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए की जनता ने चन्द महीनों में इंदिरा को वापस लाकर एक तरह से आपातकाल के औचित्य को स्वीकार कर लिया था! आपातकाल का निष्पक्ष मूल्यांकन करते विनोबाजी ने भी उसे अनुशासन पर्व भी कहा था। 'विष्णु' शेषनाग की शैया पर...... छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय अभी तक के सभी मुख्यमंत्रियों में सबसे सीधे और सरल माने जाते हैं,पर आम लोगों से उनकी मुलाक़ात नहीं हो पाती है, तभी तो जनदर्शन में भीड़ उमड़ती है। पहले सीएम अजीत जोगी तो राजनीति में आने के पहले नौकरशाह ऱह चुके थे, डॉ रमन सिँह के पास सलाहकारों की अच्छी टीम थी तो भूपेश बघेल नौकरशाहों,अपने कुछ मित्रों की सलाह पर काम करते थे।पर मौजूदा सीएम विष्णुदेव साय जिन्हें 'सांय सांय' काम करने की चर्चा एक वर्ग ने शुरू की है..उनका ज्यादा हाय-हाय में विश्वास नहीं है,दौरा भी सीमित करते हैं,अमूमन सुबह 10-11 बजे सीएम हॉउस से निकलते हैं और शाम 5-6 बजे तक वापस लौट कर आराम करते हैं, दौरे में या तो दिल्ली में रात रुके हैं या अपने गृह नगर बगीचा में....!अब तो कुछ नौकरशाह भी सीएम की तुलना शेषनाग की शैया पर सोये भगवान विष्णु देव से करने लगे हैं? हाल ही में मंत्रिमंडल सहयोगियों के साथ अयोध्या में श्रीराम, हनुमानगढ़ी में हनुमान के दर्शन करके लौटे हैं, 6/7 महीने के उनके कार्य काल में यह तय ही नहीं हो पाया कि प्रदेश में 'हनुमान' कौन है....? वैसे वे आराम करते हैं और उनकी जगह किसी भी विषय में बयानबाजी की जिम्मेदारी दोनों डिप्टी सीएमअरुण साव,विजय शर्मा ने सम्हाल ली है....!किसी भी मसले पर पिछली भूपेश सरकार को दोषी ठहराना उनका प्रिय शगल है, वित्त मंत्री तथा पूर्व नौकर शाह तो ओपी चौधरी बयानबाजी से दूर हैं..! हो सकता है कि उनका आसानी से उपलब्ध नहीं होना भी एक प्रमुख कारण हो सकता है? प्रशासनिक तौर पर अधिक सक्रिय हैं,उन्हें लोग भावी अजीत जोगी के रूप में लोग देखना चाहते थे...? पर पहली बार विधायक, मंत्री बनने के बाद उनका बदला लहजा देखकर लोग कहना शुरू कर चुके हैं कि वे रायपुर कलेक्टर ही अच्छे थे...? सीबीआई जाँच तेज, पीएससी घोटाला की! सीबीआई ने सीजी पीएससी के पूर्व अध्यक्ष और अन्य के खिलाफ कथित 'भाई-भतीजावाद' रैकेट के संबंध में एक प्राथमिकी दर्ज कर जाँच तेज कर दी है, सीजी,पीएससी के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोन वानी, पूर्व सचिव जीवन किशोर ध्रुव, एक परीक्षा नियंत्रक पर उनके बेटों, बेटियों, रिश्तेदारों,परिचितों को डिप्टी कलेक्टर, डिप्टी एसपी और ऐसे अन्य पदों पर भर्ती सुनिश्चित करने के लिए चयन सूची में आगे बढ़ाने में मदद करने मामला दर्ज किया है।सीबीआई की एफआईआर का हिस्सा है, उसमें आरोप लगाया गया है कि चयन सूची में क्रम संख्या 1-171 जगह बनाने वाले अभ्यर्थी कथित तौर पर सरकारी अधिकारियों, नेताओं, प्रभावशाली व्यक्ति यों से जुड़े हैं,इसमें डिप्टी कलेक्टरों की सूची दी गई है जिनमें छग राज्यपाल के पूर्व सचिव अमृत खलको के बेटे निखिल,बेटी नेहा, बस्तर में नक्सल अभियान के डीआईजी पी एल ध्रुव की बेटी साक्षी, कांग्रेस के एक नेता की बेटी अनन्या अग्रवाल, कांग्रेस नेता सुधीर कटियार की बेटी भूमिका और दामाद शशांक गोयल, कांग्रेस नेता राजेंद्र शुक्ला की बेटी स्वर्णिम,कांग्रेस नेता के पुत्र राजेंद्र कुमार कौशिक शामिल है।आरोप लगाया गया है कि कांग्रेस नेताओं के रिश्तेदार, जिनमें प्रज्ञा नायक, जिसका चयन डिप्टी कलेक्टर के रूप हुआ था, प्रखर नायक, वित्तीय सेवा अधिकारी के रूप में हुआ था, खुशबू बिजौरा, जिसका चयन डिप्टी कलेक्टर के रूप में हुआ था, भी कथित घोटाले के लाभार्थी थे। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि यदि छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के किसी अधिकारी के रिश्तेदार परीक्षा में बैठते हैं, तो संबंधित को आयोग के अन्य सदस्यों,अधिका रियों को सूचित करने के बाद खुद को इस प्रक्रिया से अलग करना होता है, जो सोनवानी ने नहीं किया?आरोप है कि सोनवानी ने नियमों का उल्लंघन किया, अपने परिवार के सदस्यों, अन्य प्रभावशाली व्यक्तियों के रिश्तेदारों का चयनकिया जिसे 'भ्रष्टाचार' माना जाता है।शिकायत में आरोप है कि 'परीक्षा में अच्छे अंक लाने वाले अभ्यर्थी पीएस सी अधिकारियों, सरकारी अधिकारियों और नेताओं के रिश्तेदार हैं।शिकायत में आरोप है कि अभ्यर्थियों को पहले से ही परीक्षा का पेपर उपलब्ध करा दिया गया था,जिससे उन्हें अच्छे अंक मिले और परिणामों में अच्छी रैंक मिली....? और अब बस....
  • भाजपा बद्रीनाथ हारी, फैजाबाद यानि अयोध्या हारी, बांदा यानि चित्रकूट हारी, सीतापुर हारी, इलाहाबाद यानि प्रयागराज हारी,नासिक हारी, राम नाथपुरम यानि रामेश्वरम हारी, भाजपा अधिकतर सीटें हारती जा रही है जो प्रमुख हिन्दू तीर्थस्थल हैं और जिनका भगवान श्री राम से संबंध है......
  • महादेव सट्टा जिनके कार्यकाल में फला-फूला, उसे एसपी ही कौन बनाये रखा है..?
  •  बृजमोहन अग्रवाल का उत्तराधिकारी कौन होगा..?

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