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दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल मनेंद्रगढ़ में : डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती और बैसाखी पर्व का संयुक्त आयोजन सम्पन्न

Praveen Nishee Tue, Apr 14, 2026

मनेंद्रगढ़ एमसीबी। दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल मनेंद्रगढ़ में डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती और बैसाखी पर्व का संयुक्त आयोजन हुआ, जो समानता के दर्शन और फसल की प्रचुरता के उत्सव का प्रतीक बन गया। यह समारोह न केवल छात्रों के मन में राष्ट्रप्रेम की ज्योति जागृत करने वाला था, अपितु सामाजिक न्याय और सांस्कृतिक धरोहर को एक सूत्र में बांधने वाला भी सिद्ध हुआ।

प्रातः कालीन विशेष प्रार्थना सभा में कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन तथा पुष्पांजलि अर्पण से हुआ तथा विद्यालय के पथ प्रदर्शक प्राचार्य डॉक्टर बसंत कुमार तिवारी ने भारत रत्न डॉ भीमराव अंबेडकर के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस विशेष अवसर पर कक्षा आठवीं के छात्र आरव ने अंबेडकर जी के जीवन उनके संघर्ष तथा भारतीय संविधान निर्माण में उनके अतुलनीय योगदान पर प्रभावशाली भाषण प्रस्तुत किया। इसी क्रम में कक्षा ग्यारहवीं के छात्र जसराज ने विद्यालय को बैसाखी के महत्व नई फसल परिश्रम और समृद्धि के प्रतीक से भी अवगत कराया।

बैसाखी के स्वरूप में पंजाबी लोक नृत्य भांगड़ा और गिद्दा ने मंच को झूमने पर मजबूर कर दिया, जो खेतों की हरियाली और किसान की मेहनत का प्रतीक था। कक्षा सातवीं की छात्राओं की ये प्रस्तुतियां इतनी जीवंत थीं मानो सारा पंजाब स्वयं मंच पर प्रस्तुति दे रहा हो।

संस्था के प्राचार्य डॉक्टर बसंत कुमार तिवारी ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा, "डॉ. अम्बेडकर का संविधान हमें समता का दर्पण प्रदान करता है, जबकि बैसाखी हमें मेहनत और एकता का संदेश देती है। इन दोनों का संगम ही हमारे समृद्ध राष्ट्र निर्माण का आधार है।" उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि इस विशेष अवसर पर हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम डॉक्टर अम्बेडकर के न्यायपूर्ण भारत का निर्माण करेंगे एवम् बैसाखी के पर्व की भांति मेहनत से शिक्षा जगत में अपने नाम की फसल लहराएंगे एवं हर भेदभाव को मिटाकर और राष्ट्र को मजबूत तथा गौरवान्वित बनाएंगे।

संस्था की निदेशिका श्रीमती पूनम सिंह ने सभी विद्यार्थियों तथा अभिभावकों को बैसाखी की शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए कहा कि आज का यह पावन दिन हमें दो महान संदेशों का साक्षात्कार कराता है। एक ओर डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती, जो समानता के सूर्य हैं, जिन्होंने संविधान के माध्यम से भारत को न्याय की अटूट नींव प्रदान की। दूसरी ओर बैसाखी का उल्लासपूर्ण पर्व, जो खेतों की हरियाली, किसान की मेहनत और सिख गुरु नानक देव जी के प्रेम-भक्ति के संदेश को प्रतिबिंबित करता है। डॉक्टर अंबेडकर ने दलितों, वंचितों के लिए शिक्षा का द्वार खोला, ताकि हर हाथ में कलम हो वहीं बैसाखी हमें सिखाती है कि बीज बोने वाले किसान की तरह धैर्य और परिश्रम से ही जीवन फलित होता है, यह संयोग मात्र नहीं, अपितु हमारे राष्ट्र की विविधता में एकता का प्रतीक है। आशा है कि आप अम्बेडकर के संविधान को हृदय में धारण कर, बैसाखी की मेहनत को जीवन का मूलमंत्र बनाकर, शिक्षा के दीप से सामाजिक न्याय की ज्योति प्रज्वलित करेंगे।

कार्यक्रम के अंत में सभी को यह संदेश दिया गया कि हमें अपने महापुरुषों के आदर्शों को अपनाते हुए अपने त्योहारों की संस्कृति गर्म को बनाए रखना चाहिए इस संयुक्त आयोजन विद्यार्थियों के मन में सामाजिक समरसता सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्रीय एकता की भावना को और अधिक सुदृढ़ किया। राष्ट्रगान के साथ इस अविस्मरणीय कार्यक्रम का समापन किया गया।

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