Advertisment

22nd June 2026

BREAKING NEWS

वन भूमि डायवर्सन और टेंडर प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग, प्रधानमंत्री को लिखा पत्र

811 अभ्यर्थी होंगे शामिल, बाहर से आने वाले परीक्षार्थियों के लिए विशेष आवास व्यवस्था, कंट्रोल रूम भी सक्रिय

कुछ देर की ख़ामोशी है,फिर शोर आएगा.... तुम्हारा सिर्फ वक़्त आया है, हमारा दौर आएगा....

कलेक्टर हुईं सख्त निर्देश, सुपरवाइजरों को दिया अल्टीमेटम - घर-घर जाकर करें ई-केवाईसी और हितग्राहियों का सत्यापन

जिला शिक्षा अधिकारी से प्रदेश शिक्षक कल्याण संघ की सौजन्य भेंट, शिक्षा की गुणवत्ता पर हुई चर्चा

: अब ना मैं हूँ,ना बाकी हैं ज़माने मेरे​..... फिर भी मशहूर हैं शहरों में फ़साने मेरे​.....

Admin Sat, Jan 27, 2024

बिहार के पूर्व सीएम कर्पूरी ठाकुर को मिला भारत रत्न।जननायक कर्पूरी ठाकुर स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षक,राजनेता के रूप में जाने जाते थे।बिहार के दूसरे डिप्टी सीएम,दोबार सीएम रहे कर्पूरी ने राज नीतिक जीवन में अपने सिद्धांतों को नहीं छोड़ा।इसकी वजह से वहअसली हीरो बन गए।राजनीति में लंबा सफ़र बिताने के बाद जब मरे,परिवार को विरासत में देने एक मकान तक उनके नाम नहीं था,ना तो पटना में,ना ही पैतृक घर में,वो एक इंच जमीन नहीं जोड़ पाए।जब करोड़ो रूपयों के घोटाले में आए दिन नेताओं के नाम उछल रहे हों,कर्पूरी जैसे नेता भी हुए,विश्वास ही नहीं होता। ईमानदारी के कई किस्से आज भी बिहार में सुनने को मिलते हैं। मंडल कमीशन लागू होने से पहले कर्पूरी बिहार की राजनीति में वहां तक पहुंचे, उनके जैसी पृष्ठ भूमि से आने वाले व्यक्ति के लिए पहुँचना लगभग असंभव ही था। वे बिहार की राजनीति में ग़रीब गुरबों की सबसे बड़ी आवाज़ बन कर उभरे थे। 24 जनवरी 1924 को समस्तीपुर के पितौंझिया अब कर्पूरी ग्राम) में जन्में कर्पूरी बिहार में दशकों तक विधायक, विरोधी दल के नेता भी रहे  1952 की पहली विधान सभा में चुनाव जीतने के बाद वे विधानसभा चुनाव कभी नहीं हारे। अपने दो कार्य काल में कुल मिलाकर ढाई साल के मुख्यमंत्रीत्व काल में उन्होंने जिस तरह की छाप बिहार के समाज पर छोड़ी है,वैसा दूसरा उदाहरण नहीं है। ख़ास बात ये भी है कि वे बिहार के पहले गैर कांग्रेसी सीएम थे। 67 में पहली बार डिप्टी सीएम बनने पर अंग्रेजी की अनिवार्यता को खत्म किया, इसके चलते उनकी आलोचना भी ख़ूब हुई लेकिन हक़ीक़त ये है कि उन्होंने शिक्षा को आम लोगों तक पहुंचाया। इस दौर में अंग्रेजी में फेल मैट्रिक पास का मज़ाक 'कर्पूरी डिविजन' से पास हुए हैं' कहकर उड़ाया जाता रहा....। भारत 'लोकतंत्र की जननी'और बस्तर... राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित छत्तीसगढ़ की झांकी कर्तव्य पथ पर"बस्तर की आदिम जनसंसद,मुरिया दरबार"नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड में शामिल हुई।छग की आदिवासी संस्कृति विशिष्टता,सुंदरता को दुनिया के सामने प्रस्तुत करना महत्वपूर्ण रहा।देश के 28 राज्यों के बीच कड़ी प्रतियोगिता में झांकी का रोचक विषय,रक्षा मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति को रिझाने में सफल रहा। छग की झांकी भारत सरकार की थीम 'भारत लोकतंत्र की जननी' पर आधारित है। जनजातीय समाज में आदि-काल से उपस्थित लोकतांत्रिक चेतना और परंपराओं को दर्शाती है,जो आजादी के 75 साल बाद भी बस्तर में जीवंत और प्रचलित है। इस झांकी में केंद्रीय विषय "आदिम जन संसद" के अंतर्गत जगद लपुर के "मुरिया दरबार" और कोंडागांव जिले के बड़ेडोंगर स्थित"लिमऊ राजा" को दर्शाया गया। छग से पूरी तरह खत्म होगा नक्सलवाद...? गृह मंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ में एक अहम बैठक की अध्यक्षता कर नक्सलवाद ख़त्म करने 3 साल का समय दिया है। इस बैठक में राज्य के सीएम, दोनों डिप्टी सीएम और केंद्रीय गृह सचिव, इंटेलिजेंस ब्यूरो के डीजी, छगके मुख्य सचिव,केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल केडीजी छग केडीजीपी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।गृह मंत्री ने माना कि जम्मू-कश्मीर,उत्तरपूर्व और नक्सलवाद से प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा स्थिति में सुधार हुआ है छग में वाम पंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) की स्थिति की समीक्षा के लिए एक बैठक की अध्यक्षता की। बैठक के दौरान बताया गया कि छ्ग में वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों और हिंसा में बड़ी कमी आई है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में आंतरिक सुरक्षा स्थितियों में 75% की कमी आई है।इसके साथ ही अगले तीन वर्षों में के भीतर नक्सलवाद खत्म करने की डेडलाइन तय की है। आईएएस ऋचा की हो रही है छग वापसी.... आईएएस ऋचा शर्मा छत्तीसगढ़ लौट रही है। 2019 में दूसरी बार प्रति नियुक्ति पर गयी शर्मा अभी केंद्र में फूड एंड पब्लिक डिस्ट्रब्यूशन में एडिश्नल सेकरेट्री हैं। 94 बैच की आईएएस ऋचा शर्मा के छत्तीसगढ़ लौटने के बाद कयास लगाये जारहे हैं,उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है। छ्ग में आईएएस की वरिष्टता सूची में 5वें नंबर पर हैं।1989 बैच के अमिताभ जैन,1991 बैच की रेणु पिल्ले,1992 बैच के सुब्रत साहू,1993 बैच के अमित अग्रवाल के बाद 1994 बैच की ऋचा शर्मा हैं यह भी बताना जरूरी है कि ऋचा बस्तर कलेक्टर रह चुकी हैं,इनके पिता रायपुर जेल में जेलर रह चुके हैं, यह बात और है कि ऋचा की पढाई छग से बाहर ही हुई है। और अब बस... 0सीबीआई में सराहनीय और उत्कृष्ट सेवा के लिये छ्ग के ख़ुफ़िया प्रमुख अमित कुमार को राष्ट्रपति पदक देने की घोषणा गृह मंत्रालय ने की है। 0 छ्ग के गृह मंत्री के एक एडीशनल एसपी सुरक्षा अधिकारी बनाये गये हैं। 0छ्ग में भूपेश सरकार के दागी पुलिस अफसरों को विष्णु देव सरकार हटाने में देर क्यों कर रही है? 0किस विभाग के सचिव और संचालक एक ही बैच के हैं।

विज्ञापन

जरूरी खबरें