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सुखा तेल नदी पर पुलिया का सपना साकार होने की ओर : पहले दिन ही प्रशासन सख्त, कलेक्टर ने खुद संभाली कमान

Praveen Nishee Fri, Dec 19, 2025

अमलीपदर। गरियाबंद । अंचल के ग्रामीणों के लिए वर्षों से अधूरा सपना आखिरकार ज़मीन पर उतरता दिखाई दे रहा है। सुखा तेल नदी पर बहुप्रतीक्षित पुलिया निर्माण कार्य की विधिवत शुरुआत हो चुकी है, जिससे क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही आवाजाही की समस्या के समाधान की उम्मीद जगी है।

पुलिया निर्माण का जिम्मा वेदांत कंस्ट्रक्शन कंपनी, अभनपुर को सौंपा गया है। यह कार्य लगभग 4.95 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। शासन द्वारा निर्माण पूर्ण करने की अंतिम तिथि 15 दिसंबर 2026 तय की गई है।

विभाग की सख्त निगरानी में होगा निर्माण

सेतु निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता संतोष कुमार पंडोले ने जानकारी देते हुए बताया कि पुलिया निर्माण कार्य को औपचारिक रूप से प्रारंभ कर दिया गया है। प्रारंभिक कार्य पूर्ण होते ही निर्माण की रफ्तार तेज की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्य की निरंतर मॉनिटरिंग की जाएगी ताकि गुणवत्ता और समय-सीमा से किसी भी प्रकार का समझौता न हो।

शुरुआत के साथ ही कलेक्टर का निरीक्षण

पुलिया की अहमियत को देखते हुए निर्माण के पहले ही दिन कलेक्टर गरियाबंद भगवान सिंह ऊईके स्वयं स्थल पर पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों और ठेकेदार से निर्माण की गुणवत्ता, कार्ययोजना और निगरानी तंत्र को लेकर विस्तार से चर्चा की तथा स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

कलेक्टर का यह त्वरित निरीक्षण प्रशासन की गंभीरता को दर्शाता है और यह संकेत भी देता है कि इस बार परियोजना को अधूरा छोड़ने की कोई गुंजाइश नहीं होगी।

बरसात में नदी बन जाती थी मुसीबत

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में सुखा तेल नदी जानलेवा साबित होती थी। पानी बढ़ने पर नदी पार करना बेहद जोखिम भरा हो जाता था। स्कूली बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोगों को सबसे अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। कई बार गांवों का संपर्क पूरी तरह कट जाता था, जिससे दैनिक जीवन प्रभावित होता था।

पुरानी कंपनी की नाकामी से भड़का था जन आक्रोश

गौरतलब है कि इससे पहले इस पुलिया निर्माण का कार्य एमजी एसोसिएट्स को लगभग 7.30 करोड़ रुपये की लागत से सौंपा गया था। लेकिन तय समय बीत जाने के बावजूद न तो निर्माण शुरू हुआ और न ही कोई ठोस प्रगति दिखाई दी। गंभीर लापरवाही के चलते शासन ने कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया।

इस लापरवाही के खिलाफ क्षेत्र में जन आंदोलन भी हुआ था। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री और गृह मंत्री तक को ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्या उठाई थी।

नई शुरुआत, लेकिन निगाहें सतर्क

अब नए सिरे से काम शुरू होने पर क्षेत्रवासियों में राहत और उम्मीद दोनों है। हालांकि पिछला अनुभव लोगों को सतर्क भी कर रहा है। ग्रामीणों की निगाहें अब वेदांत कंस्ट्रक्शन कंपनी और प्रशासन पर टिकी हैं—कि क्या इस बार तय समय-सीमा के भीतर पुलिया का निर्माण पूरा होगा और सुखा तेल नदी पार करने की वर्षों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान मिल पाएगा या नहीं।

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