Advertisment

16th June 2026

BREAKING NEWS

मोदी सरकार के 12 वर्ष: विकास, विश्वास और जनकल्याण की गाथा से सजी विकास प्रदर्शनी का शुभारंभ

मोदी सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने पर उपलब्धियों को जनता तक पहुंचा रही भाजपा : उज्ज्वल दीपक

फिट इंडिया एंड सेव एनवायरमेंट अभियान” के तहत 30 किलोमीटर साइकिलिंग कर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

गंभीर रूप से घायल विक्षिप्त महिला को मिला मानवीय सहयोग, उपचार के बाद सूरजपुर रेफर

विश्व रक्तदान दिवस पर स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित, 32 यूनिट रक्त संग्रहित

: आदिवासियों के सहारे सत्ता में वापसी की तैयारी कर रही है कांग्रेस, जानें क्या है सीएम का मास्टर प्लान..…...

Admin Wed, Aug 9, 2023

कौन है वो ‘रानी’ जिसके सहारे सत्ता में वापसी की तैयारी कर रही है कांग्रेस, जानें क्या है सीएम का मास्टर प्लान… विधानसभा चुनाव 2023 के लिए कांग्रेस का लक्ष्य है आदिवासी वोटर्स पर फोकस करना। 2018 में कांग्रेस की जीत में आदिवासी वोटर्स ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। रानी दुर्गावती को सम्मान देकर आदिवासी वोटर्स को लुभाने की कोशिश में है। राज्य में 29 विधानसभा सीटें आरक्षित हैं। हाइलाइट्स: राज्य में इसी साल होंगे विधानसभा चुनाव रानी दुर्गावती को फोकस कर रही हैं कांग्रेस आदिवासी वोटर्स पर है कांग्रेस की नजर लंबे समय से प्लान बना रहे हैं सीएम भूपेश बघेल रायपुर : छत्तीसगढ़ की राजनीति में सत्ता हासिल करना या सत्ता में बने रहने के लिए आदिवासी वर्ग को खुश रखना जरूरी है। इस मामले में तमाम दल पीछे नहीं रहना चाहते। छत्तीसगढ़ की वर्तमान भूपेश बघेल सरकार भी आदिवासियों के बीच अपनी गहरी पैठ बनाए रखने के लिए जगह-जगह वीरांगना रानी दुर्गावती की प्रतिमाओं की स्थापना कर रही है। गोंडवाना राज्य की रानी के तौर पर सबसे ज्यादा सम्मान पाने वाली रानियों में दुर्गावती प्रमुख हैं। इन्हें आदिवासी समुदाय देवी के तौर पर भी पूजता है। लिहाजा रानी को सम्मान दिलाकर राजनीतिक दल इस वर्ग को अपना हितैषी बताने की हरसंभव कोशिश करते हैं। बात छत्तीसगढ़ की करें तो यहां आदिवासियों के समर्थन के बगैर सत्ता हासिल करना किसी भी दल के लिए आसान नहीं है। इसकी वजह भी है क्योंकि राज्य में लगभग 34 फीसदी मतदाता इसी वर्ग के हैं। विधानसभा की 90 सीटों में से 29 सीटें इस वर्ग के लिए आरक्षित हैं। बड़ी तादाद में ऐसी विधानसभा सीटें हैं, जहां आदिवासी वोट बैंक निर्णायक है। आदिवासी वर्ग को लुभाने की कोशिश : बीते लगभग एक वर्ष की गतिविधियों पर नजर दौड़ाई जाए तो एक बात साफ हो जाती है कि इस वर्ग को लुभाने में भूपेश बघेल सरकार ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। एक तरफ जहां आदिवासी संस्कृति के प्रचार-प्रसार का अभियान चल रहा है। दूसरी ओर रानी दुर्गावती की प्रतिमाएं भी स्थापित हो रही हैं। बीते कुछ समय में कांकेर के अंतागढ़ में रानी दुर्गावती के साथ गुंडाधुर और वीर गैंद सिंह की मूर्तियों का अनावरण किया गया। इसी तरह महासमुंद के कलेक्ट्रेट में महारानी दुर्गावती की आदमकद प्रतिमा स्थापित की गई। गरियाबंद के मैनपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत कोकडी में भी वीरांगना रानी दुर्गावती की विशाल प्रतिमा का अनावरण किया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि छत्तीसगढ़ के लोगों में छत्तीसगढ़ी अस्मिता का भाव जागृत करने की वर्तमान सरकार हरसंभव कोशिश कर रही है और यही कारण है कि वह तीज, त्योहारों को खास अहमियत दे रही है। 2018 में किया था शानदार प्रदर्शन : राजनीति के जानकारों का मानना है कि राज्य में वर्ष 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित 29 सीटों में से 28 सीटों पर जीत हासिल हुई थी और पार्टी अपने इस प्रदर्शन को आगे भी बरकरार रखना चाहती है। इसके लिए जरूरी है कि आदिवासियों के मान-सम्मान के साथ उनके पूर्वजों को खास अहमियत दी जाए इसीलिए कांग्रेस की सरकार इस वर्ग के लिए कार्यक्रम, समारोह तो आयोजित कर ही रही है, साथ में विशेष सुविधाएं भी मुहैया करा रही है।

विज्ञापन

जरूरी खबरें