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सेमल की तस्करी बनी पर्यावरण विनाश का कारण : अमलीपदर क्षेत्र में हरियाली खतरे में

Praveen Nishee Mon, May 26, 2025

अमलीपदर। गरियाबंद। पर्यावरण संरक्षण की बातें अब सिर्फ भाषणों और कागज़ों तक ही सीमित होती जा रही हैं। ज़मीनी सच्चाई इससे बिलकुल उलट है। अमलीपदर क्षेत्र में सेमल प्रजाति के पेड़ों की अवैध कटाई और तस्करी इन दिनों अपने चरम पर है। ट्रकों में भरकर सेमल की लकड़ियों को रायपुर भेजा जा रहा है, वह भी बिना किसी फोरेस्ट या रेवेन्यू विभाग की जानकारी में लाए।

सूत्रों के अनुसार, तस्कर जेसीबी मशीनों और बड़े-बड़े पेड़ काटने वाले यंत्रों की मदद से पेड़ों की ढोलाई कर रहे हैं और फिर उन्हें भारी वाहनों में लादकर तस्करी कर रहे हैं। यह सब कुछ दिनदहाड़े हो रहा है, बावजूद इसके प्रशासनिक स्तर पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है।

एक तरफ जहां अवैध कटाई से हरियाली नष्ट हो रही है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्रवासी दोहरी मार झेल रहे हैं — पर्यावरणीय असंतुलन और राजस्व की हानि। सेमल के अलावा बबूल और अन्य पेड़ भी ईंट भट्टों के लिए जलाए जा रहे हैं। लगातार हो रही पेड़ों की कटाई का असर अब साफ दिखाई देने लगा है — गर्मी के मौसम में बेवक्त बारिश, तापमान में भारी उतार-चढ़ाव और जल संकट इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ग्लोबल वार्मिंग जैसी वैश्विक समस्याओं के पीछे स्थानीय स्तर पर हो रही ऐसी अवैध गतिविधियाँ भी ज़िम्मेदार हैं। अगर यह सिलसिला यूँ ही चलता रहा तो आने वाली पीढ़ियाँ सेमल जैसे पेड़ों को सिर्फ तस्वीरों में ही देख सकेंगी।

गौर करने वाली बात यह है कि इस गंभीर मुद्दे को कई बार स्थानीय समाचार पत्रों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने उठाया है, लेकिन फिर भी नतीजा सिफर रहा है। प्रशासन की निष्क्रियता और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता इस संकट को और गहराती जा रही है।

समाधान की राह क्या है?

सरकार और प्रशासन को इस पर तत्काल संज्ञान लेने की आवश्यकता है। पेड़ कटाई पर सख्त प्रतिबंध, तस्करों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, और स्थानीय लोगों में जागरूकता ही इस संकट को टाल सकती है। साथ ही, वृक्षारोपण अभियानों को ज़मीनी स्तर पर क्रियान्वित करना अब केवल विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन गया है।

आज जरूरत है कि हम सब मिलकर इस पर्यावरणीय आपदा को रोकने के लिए कदम उठाएँ, वरना कल यह विनाश हमारी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य निगल जाएगा।

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