: वन परिक्षेत्र कुँवारपुर के जंगलों में लगी आग,सागौन के पौधों से लेकर आयुर्वेद में काम आने वाली वनस्पति हुई राख, केवल निर्माण कार्य कर भ्रष्टाचार में लिप्त है विभाग।
Admin Sun, Mar 10, 2024
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मनेन्द्रगढ़। एमसीबी। जिले के वन मंडल मनेन्द्रगढ़ के अंतर्गत आने वाले वन परिक्षेत्र कुँवारपुर में लम्बे समय से जंगलों में आग लगी हुई है लेकिन विभाग के जिम्मेदार केवल निर्माण कार्यों की ओर ध्यान देकर भ्रष्टाचार करने में मस्त है। अगर जल्दी ही जंगलों की आग को नही बुझाया गया तो शासन को काफी क्षति हो जायेगी।
आपको बता दें की वन है तो जीवन है। जंगलों की सुरक्षा करना हम सबकी जिम्मेदारी है। ये सब स्लोगन केवल दीवारों पर लिखवा कर विभाग चैन की नींद सो रहा है।
वन परिक्षेत्र कुँवारपुर के बीट क्रमांक 1267 के जंगलों में भीषण आग लगी हुई है जहां लगे पौधे जलकर राख हो गये है। हवा के झोंकों के साथ जंगल जलते रहे। आग की लपटें उठती देख विभाग द्वाराआग बुझाने का प्रयास भी नहीं किया जा रहा है अगर आग पर काबू नहीं पाया गया तो पूरा जंगल खत्म हो जायेगा। स्थानीय ग्रामीणों द्वारा सूचना देने के बाद भी वन विभाग की टीम मौके पर नहीं पहुंची।
दरअसल जनकपुर के मनेन्द्रगढ़ रोड के किनारे से पेंड्राटोल नामक जगह पर सागौन के हजारों वृक्ष लगे हुए हैं। जंगल में गर्मी और पतझड़ के बीच सूखे हुए पत्तों की भरमार हो जाती है। जंगल में आग लग जाती है। जंगल आग धधक उठी। कहने को विभाग स्तर पर जंगलों को सुरक्षित करने के लिए वन समिति भी बनाई हुई है, लेकिन आग को बुझाने में समिति की सक्रिय भूमिका दिखाई नहीं दी। जंगलों में सागवान के वृक्ष हैं। इसलिए आग से प्रभावित इलाकों में भी बड़ी संख्या में सागवान की पौध नष्ट हो गई। वहीं, लंबे ऊंचे वृक्षों की पत्ते जल गए। सागवान के अलावा रोंच व तेंट के वक्षों जल गए। सागवान के अलावा रोंच व तेंदू के वृक्षों को खासा नुकसान हुआ। वन समितियों के लिए तेंदू के पत्ते रोजगार का साधन भी हैं। इसी तरह आयुर्वेद में उपयोगी बहुत सी जंगली वनस्पति भी जलकर राख हो गई। इसी प्रकार जंगली इलाकों में आदिवासी समुदाय के लोग भी काफी आबादी में रहते हैं जो कि पशुपालन से जुड़े हैं। गर्मी में सूखते जंगलों के कारण जंगली जानवर आबादी इलाकों में भी आ जाते हैं।
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