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डूमाघाट में मड़ई मेला का भव्य आयोजन : ग्रामीणों की पहल को मिली सराहना, अब स्थानीय स्तर पर ही मिलेगी दैनिक जरूरतों की सामग्री

Praveen Nishee Sun, Feb 22, 2026

गरियाबंद। ( रोशनलाल अवस्थी कलम से ) जिले के मैनपुर विकास-खण्ड अंतर्गत ग्राम डूमाघाट में पारंपरिक आस्था और ग्रामीण एकजुटता का प्रतीक मड़ई मेला उत्साहपूर्वक संपन्न हुआ। आयोजन में बड़ी संख्या में ग्रामीणों की सहभागिता रही, जहां सांस्कृतिक रंगत और सामाजिक समरसता का अद्भुत संगम देखने को मिला।

मड़ई मेला केवल धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ग्राम विकास की दिशा में एक ठोस निर्णय का मंच भी बना। ग्राम पंचायत की बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि अब डूमाघाट में प्रति शनिवार साप्ताहिक बाजार नियमित रूप से लगाया जाएगा। इस निर्णय का ग्रामीणों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ स्वागत किया।

”स्थानीय जरूरतों का स्थानीय समाधान”

ग्रामीणों का कहना है कि अब तक दैनिक उपयोग की राशन सामग्री, सब्जी, किराना व अन्य आवश्यक वस्तुओं के लिए उन्हें दूरस्थ बाजारों पर निर्भर रहना पड़ता था। इससे समय और धन दोनों की हानि होती थी। साप्ताहिक बाजार शुरू होने से न केवल क्षेत्रीय जनमानस को सुविधा मिलेगी, बल्कि स्थानीय व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में साप्ताहिक बाजार केवल व्यापार का केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक संवाद और आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम भी होते हैं। डूमाघाट में लिया गया यह निर्णय आत्मनिर्भर ग्राम व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

”ग्रामीणों की पहल की हो रही सराहना”

मड़ई मेला आयोजन और साप्ताहिक बाजार की घोषणा के बाद पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। ग्रामीणों ने इसे जनहित में लिया गया ऐतिहासिक निर्णय बताया। स्थानीय बुजुर्गों ने कहा कि वर्षों बाद ऐसा अवसर आया है जब गांव की सामूहिक सोच विकास के ठोस निर्णय में बदली है।

ग्राम पंचायत के प्रतिनिधियों ने भरोसा दिलाया कि बाजार की व्यवस्था सुव्यवस्थित ढंग से संचालित की जाएगी, जिससे स्वच्छता, सुरक्षा और पारदर्शिता बनी रहे।

”आर्थिक गतिविधियों को मिलेगा नया आयाम”

साप्ताहिक बाजार से आसपास के गांवों के किसानों, लघु व्यापारियों और महिला स्व-सहायता समूहों को भी प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। स्थानीय उत्पादों की बिक्री बढ़ेगी और गांव की अर्थव्यवस्था में गति आएगी।

डूमाघाट का यह कदम ग्रामीण विकास की नई मिसाल बन सकता है। मड़ई मेला की सांस्कृतिक गरिमा और साप्ताहिक बाजार की व्यावहारिक उपयोगिता ने गांव को नई पहचान देने की दिशा में मजबूत आधार तैयार कर दिया है।

ग्रामीणों की सामूहिक पहल से डूमाघाट अब आत्मनिर्भरता की ओर एक और सशक्त कदम बढ़ा चुका है।

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