: हवाएं शाम के झोकों जरा लिहाज करो.... ना लो चिराग जलाते ही इम्तिहां मेरा....
Admin Fri, Apr 26, 2024
लोकसभा चुनाव में आज कल विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के जेहन में आम आदमी (किसान,गरीब और महिला) छाया हुआ है।आजादी के पहले से ही आम आदमी अपने उत्थान का इंतजार कर रहा है,कभी आम आदमी,तो कभी समाज में अंतिम आदमी की बात की जाती रही है,आम आदमी की संकल्पना बुद्ध, मुगल शासकों, ईस्ट इंडिया कंपनी,कार्ल मार्क्स,नेल्सन मंडेला,महात्मा गांधी,पंडित जवाहर लाल नेहरू,बाबा साहेब अम्बेडकर, जय प्रकाश नारायण,राममनो हर लोहिया,इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, नरेन्द्र मोदी से लेकर राहुल गांधी सभी ने गढऩे की कोशिश की है। हिन्दु धर्म की जटिलता की वजह से वर्ण व्यवस्था के चलते निचले पायदान पर खड़े निर्धन लोगों का जीवन दुर्लभ होने लगा तब बुद्ध सामने आये,अनुयायियों (आम आदमी) को आम जीवन बिताने प्रेरित किया था तो मुगलों ने भी भारत की सरजमीं पर अधिकार जमाया,महलों में 'दीवान ए आम', 'दीवान ए खास'होना शुरू हुए जहां आमजनों की शिकायत सुनी जाती थी। अंग्रेजों ने करीब 200 साल तक हिन्दुस्तान में कब्जा रखा,उस समय अनपढ़, गरीब,किसान,छोटा धंधा करने वालों को 'कामनमैन' कहा जाता था,पढ़े-लिखे धनवान लोगों को 'सर' और 'बाबू' जैसे शब्दों से नवाज कर कुछ को उपाधि देने की परंपरा शुरु की गई।कार्ल मार्क्स ने तो साम्यवाद के सिद्धांत के तहत शासक (पूंजीवाद) और शोषक (आम मजदूर,जनता) दो वर्गों में बांटा था। महात्मा गांधी और पंडित नेहरू ने 'अंतिम जन' या आखरी आदमी कहा था।अंग्रेजों के समय वाईसराय का वेतन 5हजार था तो आम आदमी को एक रूपये मिला करते थे।पहले पीएम नेहरू ने अंतिम आदमी के लिए लोक तांत्रिक योजनाएं चलाई तो उनकी बेटी इंदिरा गांधी ने अपने कार्यकाल में 'गरीबी हटाओ' का नारा गढ़ा था। आपातकाल के बाद जनता पार्टी की सरकार बनी तो जयप्रकाश नारायण ने भी आम आदमी को 'जनता' कहकर संबोधित किया।राम मनोहर लोहिया भी आम आदमी को जनता ही कहते थे। इंदिरा की हत्या के बाद राजीव गांधी ने सत्ता सम्हाली तो उन्होंने कहा था एक रूपया आम आदमी तक पहुंचते-पहुंचते 15 पैसे ही रह जाता है। राजीव की हत्या के बाद सोनिया गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने 20 09 के चुनाव में नारा दिया 'आमआदमी के बढ़ते कदम,हर कदम के साथ भारत बुलंद'।इसके बाद भाजपा की सरकार बनी नरेन्द्रमोदी ने भी एक नारा दिया.... 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास ' पहली बार पूर्ण बहुमत की गैर कांग्रेसी सर कार बनी, फिर भी 'आम आदमी' जहां था वहीं रहा, हाँ,उसे मुफ्त 5 किलो चावल / गेहूं देकर संतुष्ट करने का प्रयास जारी है? फिर नये-नये नारे लोक सभा चुनाव में उछाले जा रहे हैं।फिर नेहरू,पाकि स्तान का विभाजन, संतुष्टी करण, मंगलसूत्र छीनने के बयान चर्चा में हैँ!
वोरा छ्ग लौटे,ऋचा
भी जल्दी लौटेंगी.....
छग सरकार ने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से हाल ही में लौटे 1999 बैच के आईए एस सोनमणि बोरा को नई जिम्मेदारी दी है,अजा,जजा विकास विभाग,पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक विकास का प्रमुख सचिव बनाया है। आईएएस सोनमणि बोरा केंद्र में वर्ष 2019 से लैंड मैनेजमेंट जॉइंट सेक्रेटरी थे। उनके लौटने से अब छ्ग में दो प्रमुख सचिव हो गए हैं। वहीं अब आईएएस ऋचा शर्मा छग लौट रही हैँ, 2019 में दूसरी बार प्रति नियुक्ति पर गईं थीं।1994 बैच की आईएएस ऋचा शर्मा के छग लौटने के बाद कयास लगाये जा रहे हैं कि उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारीदी जा सकती है।आईएएस की वरिष्टता सूची में 5वें नंबर पर हैं।1989 बैच के अमिताभ जैन (सीएस) 1991 बैच की रेणु पिल्ले,1992 बैच के सुब्रत साहू,1993 बैच के अमित अग्रवाल के बाद 1994 बैच की ऋचा शर्मा हैं।वे बस्तर कलेक्टर रह चुकीं हैं,इनके पिता रायपुर जेल में जेलर रह चुके हैं, यह बात और है कि ऋचा की पूरी पढाई छग से बाहर ही हुई है।
सीएम, वित्त मंत्री बने तो
कुछ आईएएस जेल में.

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